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प्रतापगढ़ में पराली जलाने पर लगेगा जुर्माना, डीएम ने तय किए मानक

प्रतापगढ़ में पराली जलाने पर लगेगा जुर्माना, डीएम ने तय किए मानक

प्रतापगढ़, 14 अक्टूबर 2025। प्रदूषण से बचाने के लिए प्रतापगढ़ में प्रशासन ने पराली जलाने पर रोक लगा दिया है। डीएम शिव सहाय अवस्थी ने इसके लिए मानक भी तय कर दिया है। डीएम शिव सहाय अवस्थी ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानि एनजीटी के आदेश के क्रम में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति हेतु अर्थदण्ड का प्राविधान किया गया है। प्रशासन ने निगरानी के लिए सचल दस्तों का गठन किया है। पराली जलते मिलने पर यह दस्ता कार्रवाई करेगा।

तय मानक के मुताबिक कृषि भूमि का क्षेत्रफल 02 एकड़ से कम होने की दशा में अर्थदण्ड रूपये 2500 प्रति घटना, कृषि भूमि का क्षेत्रफल 02 एकड़ से अधिक किन्तु 05 एकड़ तक होने की दशा में अर्थदण्ड रूपये 5000 प्रति घटना तथा कृषि भूमि का क्षेत्रफल 05 एकड़ से अधिक होने की दशा में अर्थदण्ड रूपये 15000 प्रति घटना का प्राविधान है।

डीएम श्री अवस्थी ने किसान भाईयो से अनुरोध किया है कि अपने फसल अवशेषो को न जलाये तथा फसल अवशेषो को फसल अवशेष प्रबन्धन के कृषि यन्त्रो एवं पूसा बायो डिकम्पोजर का प्रयोग करके उचित प्रबन्धन करे तथा मृदा के स्वास्थय एवं पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाये।

किसान भाई फसल कटाई के बाद फसल अवशेष प्रबंधन के यंत्रो जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, पैडी स्ट्राचापर, श्रेडर, मल्चर, श्रब मास्टर, रोटरी स्लेशर, हाइड्रोलिक रिवर्सेबुल एम०बी०प्लाऊ, जीरो टिल सीड कम फर्टीड्रिल का प्रयोग खेत में अवश्य करे अथवा क्राप रीपर, रीपर कम बाइन्डर, रेक एवं बेलर का प्रयोग कर फसल अवशेष को अन्य कार्यों जैसे-पशु चारा, कम्पोस्ट खाद बनाने, बायो कोल, बाये फयूल एवं सीबीजी आदि में उपयोग कर सकते है।

पराली को गौशालाओं ने देने का सुझाव

उन्होने यह भी बताया है कि जनपद में स्थापित गौशालाओं में पराली देकर उसके बदले खाद प्राप्त कर सकते है, जिससे गौशालाओं में भण्डारित खाद का सदुपयोग होगा तथा गौशालाओं में चारे पर होने वाले व्यय भार में कमी आयेगी और किसानों के खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी व फसल अवशेष प्रबंधन भली-भांति सम्भव हो सकेगा। फसल अवशेष को संग्रहीत कर प्रदेश में स्थापित सीबीजी प्लान्ट्स एवं अन्य जैव ऊर्जा उत्पादन इकाईयों को विक्रय कराकर कृषक अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर सकते हैं।

फसल अवशेष प्रबंधन अनिवार्य

उन्होने बताया है कि फसल कटाई के दौरान प्रयोग की जाने वाली कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम अथवा स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा रेक एवं बैलर अथवा अन्य कोई फसल अवशेष प्रबंधन यन्त्र का उपयोग किया जाना अनिवार्य होगा। अन्यथा की दशा में कम्बाइन हार्वेस्टर को सीज करने की कार्यवाही की जायेगी। फसल अवशेष को जलाने से रोकने हेतु जनपद में उप जिलाधिकारी के पर्यवेक्षण में सचल दस्ते गठित किये गये है, जिनके द्वारा की निगरानी की जा रही है।

यदि कृषक/व्यक्ति फसल अवशेष/अन्य कृषि अपशिष्टो को जलाते हुए पाया जाता है अथवा सेटलाइट के माध्यम से घटना प्रकाश में आती है तो दोषी व्यक्ति एवं संबधित कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। किसान भाई फसल अवशेष/पराली का उचित प्रबंधन कर फसल अवशेष जलाने की घटना को शून्य कर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करे।