प्रतापगढ़, 15 मई 2025। पानी जीवन का आधार है। यह न केवल पेयजल के रूप में मानव जीवन को संबल प्रदान करता है, बल्कि कृषि, उद्योग और पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी अपरिहार्य है। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के मांधाता के दक्षिणांचल क्षेत्र में बकुलाही नदी के किनारे बसे गांवों में घटते भूजल स्तर ने पानी की गंभीर समस्या को जन्म दिया है। इस संकट से निपटने के लिए बकुलाही नदी पर बैराज निर्माण की योजना ने क्षेत्रवासियों में नई उम्मीद जगाई है। इस परियोजना के तहत भयहरणनाथ धाम के समीप प्रस्तावित बैराज न केवल भूजल स्तर को सुधारेगा, बल्कि दर्जनों गांवों में पेयजल और सिंचाई की समस्या का स्थायी समाधान भी प्रदान करेगा।
मांधाता के दक्षिणांचल में बकुलाही नदी के तट पर बसे गांव जैसे पूरे वैष्णो, गौरा, बाबूपुर, डाढ़वा, डीह कटरा, छतौना, मनेहू, शिवरा, हैसी, सराय मेदी, शोभीपुर, रामनगर, और भटपुरवा आदि पिछले कई वर्षों से पानी की कमी से जूझ रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक जीत लाल पटेल ने बताया कि वर्षों पहले नदी की लूप कटिंग के जरिए उसे सीधा कर दिया गया, जिससे बरसात के पानी का ठहराव समाप्त हो गया। नतीजतन, नदी का जलस्तर कम हुआ और तटीय क्षेत्रों में भूजल स्तर लगातार नीचे खिसकता गया। इससे इन गांवों में कुओं, हैंडपंपों और नलकूपों का पानी सूखने लगा, जिसने ग्रामीणों के लिए पेयजल और खेती के लिए पानी की उपलब्धता को कठिन बना दिया।
पानी की कमी ने न केवल ग्रामीणों के दैनिक जीवन को प्रभावित किया, बल्कि उनकी आजीविका पर भी गहरा असर डाला। खेती, जो इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का आधार है, पानी की कमी के कारण प्रभावित हुई है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी न मिलने से फसल उत्पादन में कमी आई, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इसके अलावा, पेयजल की कमी ने ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों, को लंबी दूरी तक पानी लाने के लिए मजबूर किया, जिससे उनका समय और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हुए।
बकुलाही नदी पर बैराज निर्माण की योजना इस क्षेत्र की पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो सकती है। इस परियोजना के तहत नदी में एक चेक डैम बनाया जाएगा, जो बरसात के पानी को नियंत्रित मात्रा में रोककर भूजल रिचार्ज करने में मदद करेगा। विधायक जीत लाल पटेल ने बताया कि बैराज के निर्माण से नदी में पानी का ठहराव होगा, जिससे आसपास के गांवों का भूजल स्तर बढ़ेगा। इससे न केवल पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी भी मिलेगा, जो उनकी फसल उत्पादकता को बढ़ाएगा।
इस परियोजना की शुरुआत क्षेत्रीय विधायक जीत लाल पटेल और छीटाही गांव के निवासी, आईएएस अधिकारी अनुराग पटेल की पहल से हुई। अनुराग पटेल, जिनका जन्म कटरा गुलाब सिंह में हुआ, ने इस क्षेत्र की समस्याओं को गहराई से समझा और इसके समाधान के लिए सक्रिय कदम उठाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग और प्रमुख अभियंता अखिलेश सचान को पत्र लिखकर चेक डैम निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उनकी पहल के परिणामस्वरूप, 14 मई 2025 को सिंचाई खंड 2, प्रतापगढ़ की टीम ने बकुलाही नदी पर प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया।
सिंचाई खंड 2 के सहायक अभियंता पंकज राज और प्रदीप कुमार ने बकुलाही नदी के भयहरणनाथ धाम के समीप प्रस्तावित बैराज स्थल का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नदी की गहराई, प्रवाह, मिट्टी की संरचना और आसपास के भौगोलिक ढांचे का अध्ययन किया। निरीक्षण के दौरान मौजूद विधायक जीत लाल पटेल ने बताया कि बैराज का डिजाइन इस तरह तैयार किया जाएगा कि यह बरसात के पानी को नियंत्रित रूप से रोकेगा, जिससे बाढ़ का खतरा कम होगा और भूजल रिचार्ज को बढ़ावा मिलेगा।
सहायक अभियंता पंकज राज ने बताया कि चेक डैम का निर्माण नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित किए बिना किया जाएगा। यह संरचना नदी में पानी के ठहराव को सुनिश्चित करेगी, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा। साथ ही, यह डैम छोटे पैमाने पर बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण में भी सहायक हो सकता है। प्रदीप कुमार ने जोड़ा कि परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए जल्द ही एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी, जिसे मंजूरी के लिए उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा।
इस परियोजना में स्थानीय समुदाय की भागीदारी उल्लेखनीय रही है। निरीक्षण के दौरान अरविंद सिंह यादव, समाजसेवी लालजी सिंह, फूलचंद पटेल (पूर्व प्रधान, पूरे वैष्णव), अशोक मिश्रा, देवी प्रसाद, एडवोकेट विमल पटेल, एडवोकेट विपिन पटेल, सुरेश श्रीवास्तव, सुधीर मौर्या, शिव मंगल मौर्या, राम प्रसाद पटेल, मनोज पटेल, कृष्ण प्रताप पटेल, केदारनाथ पटेल (पूर्व प्रधान, नागापुर), रमाकांत पांडेय, लाल जी वैश्य, संग्राम लाल पटेल सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे। इन लोगों ने न केवल परियोजना के महत्व को समझा, बल्कि इसके लिए सक्रिय समर्थन भी जताया।
समाजसेवी लालजी सिंह ने कहा, पानी की कमी ने हमारे गांवों को संकट में डाल दिया है। बैराज निर्माण से न केवल हमारी खेती को बल मिलेगा, बल्कि हमारे बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित होगा। पूर्व प्रधान फूलचंद पटेल ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
पानी का महत्व केवल पेयजल या सिंचाई तक सीमित नहीं है। यह पर्यावरणीय संतुलन, जैव विविधता और सामाजिक-आर्थिक विकास का आधार है। बकुलाही नदी पर बैराज निर्माण से नदी का पारिस्थितिकी तंत्र भी मजबूत होगा। नदी में पानी का ठहराव स्थानीय वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करेगा। साथ ही, यह परियोजना जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, जैसे सूखा और बाढ़, से निपटने में भी सहायक होगी।
पानी की उपलब्धता ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक समानता को बढ़ावा देती है। विशेष रूप से महिलाएं, जो पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करती हैं, इस परियोजना से लाभान्वित होंगी। इससे उनका समय बचेगा, जिसे वे शिक्षा, व्यवसाय या अन्य रचनात्मक कार्यों में उपयोग कर सकेंगी। इसके अलावा, पर्याप्त पानी की उपलब्धता से खेती में विविधता आएगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।
हालांकि बैराज निर्माण की योजना ने क्षेत्रवासियों में उत्साह जगाया है, लेकिन इसकी सफलता के लिए कई चुनौतियों का सामना करना होगा। पहली चुनौती है परियोजना की वित्तीय मंजूरी और समयबद्ध कार्यान्वयन। सिंचाई विभाग को डीपीआर तैयार करने और इसे शीघ्र मंजूरी दिलाने के लिए तेजी से काम करना होगा। दूसरी चुनौती है पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन। बैराज निर्माण से नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रभाव पड़ सकता है, जिसके लिए वैज्ञानिक अध्ययन और सतत डिजाइन की आवश्यकता होगी।
इसके अलावा, स्थानीय समुदाय की निरंतर भागीदारी और जागरूकता भी महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों को परियोजना के लाभ और इसकी दीर्घकालिक देखभाल के लिए शिक्षित करना होगा। अनुराग पटेल ने आश्वासन दिया कि वे इस परियोजना को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा, कटरा गुलाब सिंह मेरी जन्मस्थली है। यदि मेरे प्रयासों से ग्रामीणों की समस्या का समाधान हो सकता है, तो मैं इसे अपनी जिम्मेदारी मानता हूं।
बकुलाही नदी पर बैराज निर्माण की योजना प्रतापगढ़ के मांधाता क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम हो सकता है। यह परियोजना न केवल पानी की कमी को दूर करेगी, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी गति देगी। पानी का महत्व जीवन के हर पहलू में है, और इस परियोजना के माध्यम से ग्रामीणों को न केवल पेयजल और सिंचाई की सुविधा मिलेगी, बल्कि उनकी जिंदगी में नई उम्मीद और समृद्धि भी आएगी।
विधायक जीत लाल पटेल और आईएएस अनुराग पटेल की पहल, सिंचाई विभाग की सक्रियता और स्थानीय समुदाय के सहयोग से यह परियोजना जल्द ही साकार हो सकती है। यह प्रयास न केवल प्रतापगढ़, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकता है, जहां जल संरक्षण और प्रबंधन के माध्यम से ग्रामीण भारत को सशक्त किया जा सकता है।

















