खुश रहना भावनात्मक स्थिरता की कुंजी: गीतांजलि

तनाव मुक्त भारत के लिए प्रतापगढ़ में कार्यशाला, ध्यान और भावनात्मक स्थिरता पर जोर

प्रतापगढ़, 21 जुलाई 2025। पीबीपीजी कॉलेज सिटी और मैत्री बोध परिवार, पुणे के संयुक्त तत्वावधान में तनाव प्रबंधन और भावनात्मक स्थिरता विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। प्राचार्य प्रो. अमित कुमार श्रीवास्तव ने इसका शुभारंभ किया।

मुख्य वक्ता गीतांजलि ने बताया कि भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव को कम करने के लिए स्वयं को समय देना जरूरी है। उन्होंने कहा, तनाव को भीतर से बाहर निकालना और भीतर से खुश रहना भावनात्मक स्थिरता की कुंजी है। उन्होंने मैत्री बोध परिवार की ‘भारत महापरिवर्तन यात्रा’ का जिक्र करते हुए बताया कि दादा श्री जी के नेतृत्व में 2032 तक चिंता मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य है। इस दिशा में मैत्री सम्बोध ध्यान मेडिटेशन सत्र आयोजित किया गया।

कार्यशाला में प्रदेश की टीम से गुंजन त्यागी और अमृत पाल सिंह सोढ़ी ने भी हिस्सा लिया। आयोजन सचिव डॉ. सीपी पांडेय और संयोजक डॉ. नीरज कुमार त्रिपाठी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। समन्वयक डॉ. अखिलेश मोदनवाल ने अतिथियों का स्वागत कर आभार जताया।

कार्यशाला में तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा हुई, जिसमें ध्यान, आत्म-जागरूकता और समय प्रबंधन पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों को भावनात्मक संतुलन के लिए मेडिटेशन की तकनीकें सिखाई गईं।

कार्यक्रम में प्रो. रामराज, प्रो. उपेंद्र कुमार सिंह, डॉ. राजीव कुमार सिंह, डॉ. वर्षा जायसवाल, डॉ. शिव प्रताप सिंह, डॉ. राकेश सिंह, डॉ. अशोक वर्मा, डॉ. भूपाल सिंह, डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. पवन कुमार सिंह, अजीत सिंह सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। यह आयोजन तनाव मुक्त जीवनशैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।