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करपात्री जी की जन्मस्थली पर लिया भारत को विश्व गुरु बनाने का संकल्प

करपात्री जी की जन्मस्थली पर लिया भारत को विश्व गुरु बनाने का संकल्प

प्रतापगढ़, 27 दिसंबर 2025। सकल हिंदू समाज आयोजन समिति द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की पावन जन्मभूमि भटनी में एक विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा को लेकर व्यापक विमर्श हुआ तथा हिंदू समाज को संगठित होने का आह्वान किया गया।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रतापगढ़ विभाग के विभाग प्रचारक ओमप्रकाश ने कहा कि हिंदू समाज मानवता और संस्कृति का संरक्षण करता है। पूज्य स्वामी करपात्री जी महाराज ने अपने त्याग और तप के माध्यम से समाज को जागृत कर धर्म को सुदृढ़ करने का कार्य किया। उन्होंने धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो जैसे कल्याणकारी उद्घोष देकर संपूर्ण विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया।

विभाग प्रचारक ओमप्रकाश ने कहा कि पूज्य करपात्री जी महाराज का स्वप्न भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने और हिंदुत्व को सशक्त करने का था। हिंदू और हिंदुत्व की सनातन अवधारणा ही विश्व में शांति और सद्भाव के लिए कल्याणकारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठित शक्ति के आधार पर ही यह उद्देश्य पूर्ण किया जा सकता है और संघ का शताब्दी वर्ष संकल्प का वर्ष है।

उन्होंने कहा कि धर्मांतरण, लव जिहाद, आतंकवाद जैसी चुनौतियों का सामना संगठित होकर ही किया जा सकता है। बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों में हिंदुओं को जाति नहीं बल्कि धर्म देखकर निशाना बनाया जा रहा है। पहलगाम जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या केवल धर्म पूछकर की गई, जो मानवता के लिए गंभीर चुनौती है। ऐसे में आज आवश्यकता है कि भेदभाव को दूर कर सामाजिक समरसता को सुदृढ़ किया जाए और संपूर्ण हिंदू समाज संगठित हो।

विभाग प्रचारक ओमप्रकाश ने कहा कि जिस प्रकार बांग्लादेश में हिंदुओं की नृशंस हत्याएं की जा रही हैं, वह हिंदू समाज के लिए चेतावनी है। अब समय शोक का नहीं, बल्कि प्रतिकार और जागरण का है। उन्होंने कहा कि आज ही भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने वाले भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती भी है। अटल जी ने अपनी दूरदृष्टि और कुशल नेतृत्व से भारतीय राजनीति को नई दिशा दी और राष्ट्रवादी विचारधारा को सशक्त किया। वे कवि हृदय थे और उनकी रचनाएं आज भी प्रेरणा देती हैं।

साथ ही उन्होंने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में युगांतरकारी योगदान देने वाले महामना मदन मोहन मालवीय जी की जयंती भी है, जिन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना कर भारत की गौरवशाली शिक्षा परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित किया। यह सप्ताह गुरु गोविंद सिंह जी के संपूर्ण परिवार के धर्म की रक्षा हेतु दिए गए बलिदान को भी स्मरण करने का है। गुरु गोविंद सिंह जी के चारों पुत्रों और माता गुजरी ने धर्म परिवर्तन स्वीकार करने के बजाय बलिदान को चुना।

उन्होंने आह्वान किया कि ऐसे महापुरुषों और वीर बलिदानियों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र और धर्म विरोधी शक्तियों का संगठित होकर प्रतिकार किया जाए और पूज्य करपात्री जी महाराज के संकल्प को साकार करते हुए भारत को विश्व गुरु बनाने में प्रत्येक नागरिक अपनी भूमिका निभाए।

कार्यक्रम के आरंभ में पूज्य स्वामी करपात्री जी महाराज और भारत माता के चित्र पर अतिथियों द्वारा पुष्पार्चन किया गया। अंत में भारत माता की आरती और जयघोष के साथ हिंदू सम्मेलन संपन्न हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता गोकर्ण ओझा ने की तथा संचालन ओमप्रकाश पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर महंत मनोज ब्रह्मचारी, साध्वी विभा, रघुवर दयाल, विभाग बौद्धिक शिक्षण प्रमुख डॉ. सौरभ पाण्डेय, पूर्व जिलाध्यक्ष हरिओम मिश्र, छोटे सरकार, विवेक उपाध्याय, जिला कार्यवाहिका प्रिया त्रिपाठी, सुरेश बहादुर सिंह सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु और नागरिक उपस्थित रहे।