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Building Plans Approved in the Name of a Non-existent Architect

छत्तीसगढ़ में वजूदहीन आर्किटेक्ट के नाम पर पास हुए 400 नक्शे

रायपुर, 15 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में शहरी विकास की आड़ में चल रहे एक ऐसे संगठित भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने नगर पालिक निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की साख को हिलाकर रख दिया है। एक ऐसे आर्किटेक्ट ‘विकास सिंह’ के नाम पर शहर में 400 से अधिक भवनों के नक्शे और 150 से ज्यादा लेआउट पास कर दिए गए, जिसका पेशेवर रिकॉर्ड में कोई वजूद ही नहीं है।

इस खेल में बिल्डर और अधिकारियों की मिलीभगत से मास्टर प्लान को धता बताकर शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि पहुंचाई गई है। भ्रष्टाचार की यह परत ‘मेसर्स अनंत रियाल्टी’ नामक प्रोजेक्ट की जांच से खुली। बिल्डर नमन गोयल द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में पहले चार मंजिलों पर 60 फ्लैट दर्शाए गए थे, लेकिन विभाग से स्वीकृत नक्शे में जादुई तरीके से यह संख्या 90 फ्लैट और 6 मंजिल हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि एरिया स्टेटमेंट और नक्शे में इतना बड़ा अंतर बिना विभागीय संरक्षण के संभव नहीं है।

फर्जी पहचान का ‘मास्टरमाइंड’ आकिर्टेक्ट

जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य ‘विकास सिंह’ नामक आकिर्टेक्ट का आया। नगर निगम और ‘इंडियन इंस्टीट्यूट आफ आकिर्टेक्ट्स’ के रिकॉर्ड में इस नाम का कोई पंजीकृत पेशेवर मौजूद ही नहीं है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी फर्जी नाम का इस्तेमाल ‘महुआ होटल’ के अवैध निर्माण में भी हुआ था, जिसे निगम ने हाल ही में ढहाया है। ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद इसी पहचान पर बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलना एक गहरे सिंडिकेट की ओर इशारा करता है।

दिया गया झूठा शपथ पत्र

नियमों के मुताबिक बड़े प्रोजेक्ट्स में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (एहर) के लिए आवास अनिवार्य हैं। बिल्डर नमन गोयल ने तिफरा की जिस जमीन (खसरा नं. 407/7) पर एहर फ्लैट बनाने का शपथ पत्र दिया, वह जमीन उनके नाम पर दर्ज ही नहीं है। यानी कागजों पर फर्जीवाड़ा कर गरीबों के आवास की अनिवार्यता से बचते हुए विकास अनुज्ञा हासिल कर ली गई।

करोड़ों का खेल और ‘सुपरफास्ट’ मंजूरी

भ्रष्टाचार की रफ्तार का आलम यह था कि एक ही दिन में 29 लेआउट फाइलों को हरी झंडी दे दी गई। अनुमान है कि नक्शा और लेआउट पास कराने के इस खेल में करोड़ों रुपये की अवैध उगाही की गई है। अब शहर के जागरूक नागरिक और सामाजिक संगठन इस पूरे ‘नक्शा घोटाले’ की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।