नई दिल्ली, 28 दिसंबर 2025। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भारत आज दुनिया का चौथा सबसे बड़ा अर्थतंत्र बन चुका है और हिन्द महासागर के कारण उसका जियो-पोलिटिकल स्थान भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेगी, उसी अनुपात में आंतरिक और बाहरी चुनौतियां भी बढ़ेंगी। ऐसे में देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सजग, मजबूत तथा दूरदर्शी बनाना समय की मांग है।
दिल्ली में आयोजित आतंकवाद निरोधी सम्मेलन में उन्होंने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की तैयारियां केवल हमारी सीमाओं तक सीमित नहीं हो सकतीं। सीमा सुरक्षा की प्रभावी तैयारी हमें कई मील दूर से शुरू करनी होगी, ताकि संभावित खतरों को समय रहते पहचाना और निष्क्रिय किया जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में सुरक्षा के पारंपरिक तरीके पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि नई तकनीकों और रणनीतियों को अपनाना होगा।
अमित शाह ने कहा कि आज स्पष्ट रूप से साइबर और सूचना प्रसार युद्ध, आर्थिक नेटवर्क का दुरुपयोग तथा आतंकवाद के हाइब्रिड स्वरूप जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं। इनसे निपटने के लिए देश को राष्ट्रीय ग्रिड के रूप में एक ऐसा सुदृढ़ तंत्र विकसित करना होगा, जो सजग होने के साथ-साथ त्वरित और परिणामोन्मुखी कार्रवाई करने में सक्षम हो। उन्होंने कहा कि यह तभी संभव है जब सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम करें और साझा रणनीति अपनाएं।
गृह मंत्री ने मल्टी-लेयर सिक्योरिटी मॉडल की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत करना होगा, ताकि किसी भी प्रकार के खतरे को प्रारंभिक चरण में ही रोका जा सके। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ “रूथलेस अप्रोच” अपनाने की बात कहते हुए स्पष्ट किया कि इस दिशा में किसी भी प्रकार की ढिलाई देश की सुरक्षा के लिए घातक हो सकती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन नीति निर्माण, अनुभव साझा करने और भविष्य की चुनौतियों के लिए रणनीति तय करने का महत्वपूर्ण मंच होते हैं। इन बैठकों के माध्यम से ही देश एक मजबूत, सजग और आधुनिक सुरक्षा ढांचा विकसित कर सकता है, जो भारत को आने वाले वर्षों में सुरक्षित रखने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
















