रायपुर, 25 सितंबर 2025। जल संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर अपनी छाप छोड़ी है। जल संचय जनभागीदारी 1.0 (जेएसजेबी) अभियान के परिणामों में प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि न केवल एक सम्मान है, बल्कि जल प्रबंधन को जन-आंदोलन में बदलने का जीवंत प्रमाण है। अब तक प्रदेश में 4,05,563 जल संरक्षण कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जो सामूहिक प्रयासों का प्रतीक हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस सफलता पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा, “यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल-संपदा की मजबूत नींव रखेगी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि जल संरक्षण के इस क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने सामूहिक चेतना का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा। जेएसजेबी अभियान, जो जल शक्ति अभियान का हिस्सा है, ने ‘कैच द रेन’ थीम के तहत वर्षा जल संचय पर जोर दिया। छत्तीसगढ़ में 2.29 लाख कृत्रिम रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण सामुदायिक भागीदारी से हुआ, जो राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक है। यह आंकड़ा मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से आगे है।
प्रदेश के शहरी निकायों ने भी अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। रायपुर नगर निगम ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। यहां 33,082 कार्यों के माध्यम से जल संरक्षण को बढ़ावा दिया गया, जो जन-सहभागिता आधारित शहरी विकास का अनुकरणीय मॉडल बन गया। मुख्यमंत्री ने इसे रायपुर के नागरिकों, निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामूहिक प्रयासों का फल बताया। रायपुर, जो छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा नगर निगम है, ने वर्षा जल संचय, बोरवेल रिचार्ज और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार में अग्रणी भूमिका निभाई।
जिला स्तर पर छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा। कैटेगरी-1 में बालोद प्रथम, राजनांदगांव द्वितीय तथा रायपुर तृतीय स्थान पर रहा। इन तीनों जिलों को 2-2 करोड़ रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। कैटेगरी-2 में महासमुंद, बलौदा बाजार और गरियाबंद को 1-1 करोड़ रुपये मिलेंगे। वहीं, कैटेगरी-3 में बिलासपुर, रायगढ़, बलरामपुर, धमतरी, सूरजपुर और दुर्ग को 25-25 लाख रुपये के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। यह वितरण दर्शाता है कि जल संरक्षण को प्रदेश के हर कोने में प्राथमिकता दी गई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा, “यह सम्मान केवल प्रशासन का नहीं, बल्कि हर किसान, महिला, नौजवान और जनप्रतिनिधि का है, जिन्होंने पानी की हर बूंद बचाने का संकल्प लिया।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राज्य की जन-संवाद एवं जनभागीदारी आधारित सुशासन नीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। जल संरक्षण को प्रदेश की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और दीघर्कालिक विकास का मूल आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि बिना जल सुरक्षा के कोई भी प्रगति अधर में लटक जाएगी।
रायपुर नगर निगम के राष्ट्रीय सम्मान पर मुख्यमंत्री ने विशेष सराहना की। उन्होंने कहा, शहरी क्षेत्र में सामुदायिक सहयोग से जल संचय की यह मिसाल अन्य नगर निगमों के लिए अनुकरणीय है। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों का आह्वान किया कि जल संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम न मानकर जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाएं। उन्होंने जोर देकर कहा, बूंद-बूंद का संरक्षण ही भविष्य की जल-सुरक्षा की गारंटी है।















