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छत्तीसगढ़ में बाल अधिकार संरक्षण पर सख्त हुईं आयोग अध्यक्ष

रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बाल गृहों, स्कूलों और संस्थानों में पाई गई गंभीर अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

रायपुर, 05 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट संदेश दिया कि बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़े किसी भी मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रदेशभर से प्राप्त निरीक्षण रिपोर्टों और शिकायतों की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को त्वरित और कठोर कार्रवाई के निर्देश जारी किए।

प्रेस वार्ता में बाल संरक्षण गृहों और पर्यवेक्षण गृहों में हाल ही में हुए औचक निरीक्षणों की विस्तृत जानकारी साझा की गई। निरीक्षण टीमों को कई संस्थानों में स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्था और देखभाल में गंभीर कमियां मिलीं। कुछ स्थानों पर अनुशासनहीनता, बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार, सुरक्षा गार्डों की कमी और परिसर में नशीले पदार्थों की उपलब्धता जैसी गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं। आयोग ने ऐसी सभी कमियों पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने और दोषियों पर कार्रवाई करने को कहा है।

डॉ. शर्मा ने बताया कि कोरबा दौरे के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बाल संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण कर बच्चों की स्थितियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है तथा इस दिशा में योजनाओं और निगरानी को और मजबूत किया जा रहा है।

विद्यालयों की स्थितियों पर भी आयोग ने गहरी चिंता व्यक्त की। कई स्कूलों में साफ-सफाई की कमी, खेल मैदानों की जर्जर अवस्था और स्कूल परिसर के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री के मामले रिपोर्ट किए गए। इस पर आयोग ने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को संयुक्त कार्रवाई करते हुए स्कूलों में सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी समीक्षा में भी गंभीर कमियां सामने आईं। कई बाल संस्थानों में दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की कमी पाई गई। इस पर आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को पांच दिनों के भीतर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

बैठक में बाल उत्पीड़न, शोषण और प्रताड़ना से जुड़े मामलों पर विशेष जोर दिया गया। आयोग ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में तुरंत संज्ञान लेकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

इसके साथ ही, राज्यभर में बाल अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ी जागरूकता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और बाल गृहों के कर्मचारियों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

अंत में डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि आयोग बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी और सभी संस्थानों पर नियमित निरीक्षण जारी रहेंगे।