छत्तीसगढ़

जयघोष, कलश और धर्मध्वजा के साथ साधु भगवंतों के स्वागत में उमड़ा जैन समाज

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On जुलाई 22, 2026
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Auspicious Entry of Samvegaratna Sagar

रायपुर, 22 जुलाई 2026। जैन समाज के लिए बुधवार का दिन आध्यात्मिक उल्लास और श्रद्धा का साक्षी बना। श्री जैन श्वेताम्बर मूतिर्पूजक समाज एवं चातुर्मास समिति (अंतर्गत श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट) की ओर से आयोजित सर्वमंगलमय वर्षावास के तहत परम पूज्य मुनिश्री संवेगरत्न सागरजी म.सा. आदि ठाणा-5 का विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में भव्य मंगल प्रवेश कराया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी, जयघोष, मंगलगीत और धर्मध्वजाओं के बीच निकली शोभायात्रा ने पूरे मार्ग को भक्तिमय बना दिया।

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लूणीया ने बताया कि शोभायात्रा श्री ऋषभदेव मंदिर, सदर बाजार से प्रारंभ होकर सिटी कोतवाली, पेंशनबाड़ा, टैगोर नगर मार्ग होते हुए विवेकानंद नगर पहुंची। श्रद्धालु हाथों में धर्मध्वजाएं, स्वागत पोस्टर और सिर पर मंगल कलश लेकर चल रहे थे। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर समाजजनों ने साधु-साध्वी भगवंतों का पुष्पवर्षा और श्रद्धाभाव से स्वागत किया।

विवेकानंद नगर पहुंचने पर साधु-साध्वी भगवंतों ने श्री संभवनाथ जिनालय में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में मंगल प्रवेश के साथ धर्मसभा का शुभारंभ हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धमर्लाभ प्राप्त किया।

28 जुलाई से चातुर्मास का शुभारंभ

चातुर्मास समिति के महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि वर्षावास के तहत 28 जुलाई से चातुर्मास का औपचारिक शुभारंभ होगा। तब तक विभिन्न धार्मिक क्रियाएं निरंतर चलती रहेंगी। चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह 8:45 बजे से श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय, विवेकानंद नगर में नियमित प्रवचन आयोजित होंगे। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ लेने की अपील की।

सही दृष्टि मिलना जरूरी

सर्वमंगलमय वर्षावास के मंगल प्रवेश अवसर पर आयोजित धर्मसभा में परम पूज्य मुनिश्री संवेगरत्न सागर म.सा. ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिनवाणी का केवल श्रवण करना पर्याप्त नहीं, उसे सही दृष्टि के साथ समझना और जीवन में उतारना आवश्यक है।

मुनिश्री ने कहा कि आंख और दृष्टि दोनों अलग-अलग हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि यदि किसी सिक्के को देखकर केवल यह पहचानना है कि वह सिक्का है, तो यह कार्य आंख करती है, लेकिन उस सिक्के का मूल्य समझना दृष्टि का कार्य है। ठीक इसी प्रकार धर्म को केवल देखना या सुनना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसके वास्तविक महत्व को समझना आवश्यक है।

मुनिश्री ने कहा कि आज सभी लोग यह मान रहे हैं कि मेरा मंगल प्रवेश हुआ है, जबकि जिस दिन मैंने संयम धारण किया था, उसी दिन मेरा मंगल प्रवेश हो चुका था। वास्तव में आज मेरा नहीं, आप सभी का मंगल प्रवेश हुआ है। धर्म के प्रति जागृति और सही दृष्टिकोण ही वास्तविक मंगल प्रवेश है।

मुनिश्री ने कहा कि दृष्टि की प्राप्ति पुरुषार्थ का विषय है। वर्षावास का यह दुर्लभ अवसर पुण्य की पुष्टि और आत्मा की शुद्धि के लिए मिला है। देव, गुरु और धर्म के दर्शन से पुण्य का संचय होता है, लेकिन अब भाव-निद्रा से जागकर आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ना होगा। यदि 120 दिनों के चातुर्मास में कोई साधक निरंतर प्रभु की वाणी, धर्म और पंच परमेष्ठी से जुड़ता है, तो उसके भीतर आत्मशुद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

चप्पू चलाने से नहीं लगेगी जीवन की नैया पार

धर्मसभा में परम पूज्य मुनि श्री शाश्वत रत्न जी म.सा. ने प्रेरक प्रसंग के माध्यम से आत्मजागरण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिनवाणी सुनना ही पर्याप्त नहीं, उसे जीवन में उतारना भी आवश्यक है। मुनिश्री ने बताया कि एक बार तीन युवक नदी किनारे घूमने पहुंचे। मौसम सुहावना था, इसलिए उन्होंने नाव से सैर करने का निर्णय लिया। रात हो गई और तीनों मदिरा के नशे में थे। उन्होंने नदी पार करने के उद्देश्य से पूरी रात चप्पू चलाए। सुबह जब सूर्योदय हुआ तो उन्हें लगा कि वे दूसरे किनारे पर पहुंच गए होंगे, लेकिन देखा कि नाव वहीं खड़ी है। कारण यह था कि उन्होंने नाव की रस्सी खूंटी से खोली ही नहीं थी।

उन्होंने इस प्रसंग को जीवन से जोड़ते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन भी इसी नाव की तरह है। जब तक जीवन रूपी नाव संसार की मोह-माया की खूंटी से बंधी रहेगी, तब तक आत्मकल्याण संभव नहीं है।

मुनिश्री ने कहा कि यह चातुर्मास आत्मजागरण का अवसर है। यदि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है तो धर्म को केवल सुनना नहीं, बल्कि आचरण में भी उतारना होगा। जब मनुष्य मोह-माया के बंधनों से स्वयं को मुक्त करेगा, तभी उसकी जीवन रूपी नैया भवसागर से पार लग सकेगी।

Ramesh Pandey

Ramesh Pandey

रमेश पांडेय (Ramesh Pandey) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टिंग में 20 वर्षों का अनुभव है।