प्रतापगढ़, 15 सितंबर 2025। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के गोई सरखेलपुर में पंडित पारसनाथ आचार्य की पुण्यतिथि पर एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। पंडित रमेश चंद्र शुक्ला आचार्य की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में संस्कृत विद्वान, व्याकरणाचार्य, शिक्षक, अधिवक्ता और समाज के संभ्रांत व्यक्तियों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया। इस अवसर पर सनातन धर्म, संस्कृति, संस्कार और समाज सुधार जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
समारोह की शुरुआत पंडित पारसनाथ आचार्य के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुई। इसके पश्चात अध्यक्ष पंडित रमेश चंद्र शुक्ला ने श्रीमद्भागवत के श्लोकों का सस्वर पाठ किया। इस अवसर पर उपस्थित विद्वानों ने पंडित पारसनाथ के समाज सुधार और सनातन धर्म के प्रति उनके योगदान को याद किया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व मंत्री प्रो. शिवाकांत ओझा ने अपने संबोधन में पंडित पारसनाथ को महामानव बताते हुए कहा, उन्होंने सदैव समाज के हित में कार्य किया। आज समाज में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और अपराध चिंता का विषय हैं। हमें अपनी संस्कृति और संस्कारों की रक्षा करनी होगी। उन्होंने समाज के बौद्धिक वर्ग से अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को सुधारने की जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया।
प्रो. ओझा ने यह भी जोड़ा कि हिंदू शब्द की व्याख्या वेदों में है, जैसा कि परम पूज्य जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी कहते हैं। उन्होंने राष्ट्र और समाज को सर्वोपरि मानते हुए सभी से एकजुट होकर समाज सुधार के लिए कार्य करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के समापन सत्र में धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने अपने उद्बोधन में पितृपक्ष के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, पितृपक्ष वर्ष में एक बार हमारे पितरों को तृप्त करने का अवसर देता है। श्रद्धा से किया गया कार्य ही श्राद्ध है। उन्होंने संस्कृति, संस्कृत और संस्कार को सनातन धर्म का प्राण बताते हुए गीता, गंगा और गायत्री को हमारी पहचान का आधार बताया। धर्माचार्य ने कहा, जो पुत्र अपने पितरों के लिए कुछ करता है, वही सच्चा पुत्र है। जीवित माता-पिता की सेवा और उनके न रहने पर पिंडदान और ब्राह्मणों को दान करना हमारा कर्तव्य है।
इस अवसर पर ओम प्रकाश त्रिपाठी (पूर्व भाजपा अध्यक्ष), पंडित गिरजा शंकर त्रिपाठी, सेवानिवृत्त आईएएस निर्मल शरण दास, स्वामी रामपूरन त्रिपाठी, आलोक ऋषि वंस, पंडित महेंद्र मिश्रा (एडवोकेट), डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह, अशोक राय, आचार्य नरेंद्र पांडे, पंडित मदन पांडेय, पंडित कृष्ण कांत त्रिपाठी, पंडित सुधाकर दत्त मिश्रा सहित अनेक विद्वानों ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में 50 मूर्धन्य विद्वानों, संतों और शिक्षकों को अंग वस्त्र और माल्यार्पण द्वारा सम्मानित किया गया। अंत में, आयोजक आचार्य उमाकांत त्रिपाठी ने सभी उपस्थित महानुभावों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन आचार्य अमित पांडेय और पंडित शिवेंद्राचार्य ने कुशलता से किया।
















