जगदलपुर, 17 अक्टूबर 2025। बस्तर पुलिस द्वारा संचालित ‘पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन’ कार्यक्रम के तहत एक बार फिर अनेक माओवादी कैडर ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया। यह प्रेरणादायक आयोजन शुक्रवार को पुलिस लाइन, जगदलपुर में आयोजित हुआ, जिसमें प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडर्स का स्वागत परंपरागत मांझी-चालकी द्वारा किया गया। उन्हें संविधान की प्रति और प्रेम, शांति एवं नए जीवन के प्रतीक लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर नक्सल उन्मूलन प्रभारी एडीजी विवेकानंद सिन्हा, सीआरपीएफ के बस्तर रेंज प्रभारी, कमिश्नर डोमन सिंह, बस्तर रेंज आईजी सुंदरराज पी. सहित कलेक्टर बस्तर हरिस एस, बस्तर संभाग के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, पूर्व पुलिस अधीक्षक, नक्सल उन्मूलन गतिविधियों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रही।
डीजीपी श्री गौतम ने अपने संबोधन में कहा कि पूना मारगेम का उद्देश्य केवल नक्सलवाद से दूरी बनाना नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देना है। जो आज मुख्यधारा में लौटे हैं, वे समाज में शांति, विकास और विश्वास के दूत बनेंगे।
उन्होंने आत्मसमर्पित माओवादियों से कहा कि वे अब अपने अनुभव और ऊर्जा को समाज निर्माण में लगाएं, ताकि बस्तर का भविष्य उज्ज्वल हो सके। कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग द्वारा आत्मसमर्पित कैडर्स को पुनर्वास सहायता राशि, आवास और आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन इन युवाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास और शिक्षा के अवसर प्रदान कर रही है, जिससे वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
मांझी-चालकी प्रतिनिधियों ने कहा कि बस्तर की परंपरा और संस्कृति हमेशा से प्रेम, सहअस्तित्व और शांति का संदेश देती रही है, और जो साथी अब लौटे हैं, वे इस भावना को मजबूत करेंगे। कार्यक्रम के अंत में सभी आत्मसमर्पित माओवादियों ने संविधान की शपथ लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट की। पुलिस बैंड द्वारा वंदे मातरम् की धुन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।













