रायपुर, 12 सितंबर 2025। संगीत सम्राट राजा चक्रधर सिंह को अब भारत रत्न सम्मान देने की मांग उठी है। यह मांग पद्यश्री भारती बंधु और डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा ने संयुक्त रुप से उठाई है। शुक्रवार 12 सितंबर 2025 को पद्यश्री भारती बंधु और डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा रायपुर प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता की।
उन्होंने बताया कि आज से 92 वर्ष पूर्व 20 से 40 के दशकों में जनजातिय वनवासी, आदिवासी राजा जथा सिंह ने मात्र 40 वर्ष की अल्प आयु में ही अपने 23 वर्षों के शासन काल में साहित्य एवं संगीत नृत्य के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया था। वनवासी आदिवासी राज्य रायगढ़ में 1924 से 1947 तक छत्तीसगढ़ जैसे पिछड़ा वर्ग क्षेत्र में कला, संस्कृति और साहित्य का केन्द्र बिन्दु रायगढ़ दरबार ही रहा।
अपने पिता महाराजा भूदेव सिंह जी से कला संस्कृति विरासत में पाकर विलक्षण प्रतिभा के धनी राजा चक्रधर सिंह संगीत और नृत्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वैसे तो वह संगीत की तीनों विद्या गायन, वादन और नृत्य के ज्ञाता थे। संगीत, नृत्य और साहित्य को वे अपना इष्टदेव मानते थे।
वह अपने दरबार को मां सरस्वती का पवित्र मंदिर मानते थे। महाराज चक्रधर सिंह संस्कृत, हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी भाषा साहित्य के विद्वान ही नहीं बल्कि उच्चकोटि के रचनाकार भी थे। हिन्दी में चक्रपिया के नाम से और उर्दू में फरहत के नाम से रचना करते थे। उन्होंने चक्रपिया के नाम से ठुमरी, भजन मंदिशों आदि अनेकों रचनाओं का भी सृजन किया।
नृत्य जगत में नर्तन सर्वश्वम एवं मुरज पर्ण पुष्पाकर नामक ग्रंथ की रचना कर विश्व पटल में अपना नाम अंकित किया। और इन दोनों ग्रंथों ने कथक नृत्य को समृद्धशाली शास्त्र एवं प्रायोगिक पक्ष को मजबूती प्रदान किया।
डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा स्नातक संगीत महाविद्यालय चक्रधर कत्वक कल्याण केन्द्र राजनांदगांव (छ.ग.) के संस्थापक हैं। उन्होंने मांग किया कि राजा चक्रधर सिंह को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया जाय। इस मौके पर तुषार सिन्हा भी उपस्थित रहे।














