पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में टेली-क्लासेस का शुभारंभ
रायपुर, 19 फरवरी 2025। पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक अभिनव प्रयास किया है। टेलिकम्यूनिकेशन की आधुनिक तकनीक के माध्यम से टेली-क्लासेस की शुरुआत की गई, जिससे राज्य के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को एक साथ उच्चस्तरीय व्याख्यान सुनने का अवसर मिलेगा।
इस पहल के तहत पहला व्याख्यान वरिष्ठतम चिकित्सा शिक्षक डॉ. अरविंद नेरल ने दिया। यह व्याख्यान एच.आई.वी./एड्स पर केंद्रित था, जिसमें डॉ. नेरल ने एड्स रोग की प्रारंभिक जानकारी, एच.आई.वी. की संरचना और संक्रमण के फैलाव पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
महाविद्यालय के अधिष्ठाता, डॉ. विवेक चौधरी ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों को लाभ मिलेगा, विशेष रूप से वहां, जहां अनुभवी चिकित्सा शिक्षकों की संख्या सीमित है।
लाइव स्ट्रीमिंग तकनीक के माध्यम से सभी मेडिकल कॉलेजों में एक साथ व्याख्यान प्रस्तुत किए जाएंगे, जिससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी। आयुक्त चिकित्सा शिक्षा, श्रीमती किरण कौशल के मार्गदर्शन में इस टेली-क्लास सुविधा को विकसित किया गया है।
इनका रहा सहयोग
इस परियोजना को सफल बनाने में फिजियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित त्रिपाठी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके तकनीकी मार्गदर्शन में यह सुविधा वास्तविकता बनी। इस कार्य में सुश्री रितु कौशिक और ताराचंद पौषार्य का भी उल्लेखनीय सहयोग रहा, जिन्हें उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सात महाविद्यालयों में हुआ प्रसारण
टेली-क्लास प्रणाली के माध्यम से बिलासपुर, अंबिकापुर, महासमुंद, दुर्ग, राजनांदगांव, कांकेर और कोरबा के चिकित्सा महाविद्यालयों में द्वितीय एमबीबीएस के विद्यार्थियों के लिए व्याख्यान का सीधा प्रसारण किया गया। इस कार्यक्रम में राजनांदगांव चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता, डॉ. पी.के. लुका और सिम्स बिलासपुर की डॉ. सुपर्णा गांगुली ने भी भाग लिया और इस आधुनिक सुविधा की सराहना की।
मार्च से होंगे नियमित व्याख्यान
भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए डॉ. अरविंद ने बताया कि मार्च 2025 से फाइनल एमबीबीएस विद्यार्थियों के लिए नियमित रूप से ऐसे व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए विस्तृत विषयवार समय सारणी तैयार कर सभी चिकित्सा महाविद्यालयों को भेजी जाएगी। इस अभिनव पहल से न केवल चिकित्सा शिक्षा को डिजिटल और व्यापक बनाया जाएगा, बल्कि विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल लर्निंग का भी लाभ मिलेगा।