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फाइलेरिया मुक्त गौरा अभियान का आगाज़

कृमि मुक्त गौरा अभियान का आगाज़, स्कूलों में हुआ दवा वितरण

गौरा (प्रतापगढ़), 10 फरवरी 2026। बच्चों के पेट में उत्पन्न कृमि से होने वाली बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए गौरा में ठोस पहल हुई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौरा के अधीक्षक डॉ अजय सिंह के नेतृत्व में कृमि मुक्त गौरा अभियान का शुभारंभ किया गया। अभियान के पहले ही दिन स्वास्थ्य टीम स्कूलों तक पहुंची और बच्चों को दवा खिलाकर समाज को जागरूक करने का संदेश दिया।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के तहत 10 फरवरी से विशेष दवा वितरण अभियान शुरू हुआ है। इस अभियान में 1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली पीसकर खिलाना है। 2 वर्ष से अधिक से लेकर 19 वर्ष तक के बच्चों को एक गोली चबाकर खाना है। इसी क्रम में डॉ अजय सिंह ने बीएमसी नरेन्द्र मिश्र के साथ विंध्यवासिनी इंटर कॉलेज सहित आधा दर्जन से अधिक स्कूलों का दौरा किया।

स्कूलों में छात्र-छात्राओं को दवा खिलाई गई। बीएमसी नरेन्द्र मिश्र ने बताया कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जन-भागीदारी से चलने वाला स्वास्थ्य आंदोलन है।

कृमि क्या है

कृमि (Worms) मानव शरीर में पाए जाने वाले परजीवी कीड़े होते हैं, जो आंतों में रहकर शरीर का पोषण चूसते हैं। ये खासकर बच्चों में ज्यादा पाए जाते हैं और धीरे-धीरे शरीर को कमजोर बना देते हैं। आमतौर पर गोल कृमि, फीताकृमि और हुकवर्म सबसे ज्यादा पाए जाते हैं।

कृमि संक्रमण होने पर बच्चों में कमजोरी, खून की कमी, पेट दर्द, उल्टी, दस्त, वजन न बढ़ना, पढ़ाई में ध्यान न लगना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई बार लक्षण तुरंत नजर नहीं आते, लेकिन अंदर ही अंदर शरीर को नुकसान पहुंचता रहता है।

कृमि संक्रमण के कारण

  • बिना हाथ धोए खाना खाने से
  • गंदा या अधपका भोजन करने से
  • खुले में शौच करने से
  • नंगे पैर गंदी मिट्टी में चलने से
  • गंदा पानी पीने से

कृमि से कैसे बचें

  • स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जाने वाली एलबेंडाजोल की गोली अवश्य लें
  • खाना खाने से पहले और शौच के बाद हाथ साबुन से धोएं
  • खुले में शौच न करें, शौचालय का उपयोग करें
  • बच्चों को नंगे पैर बाहर न जाने दें
  • साफ पानी पिएं और भोजन अच्छी तरह पकाकर खाएं
  • घर और स्कूल परिसर में साफ-सफाई रखें