नई दिल्ली, 28 दिसंबर 2025। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की मेहनत की कमाई निष्क्रिय खातों में पड़ी हुई है, जिसका लाभ सही दावेदारों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए ईपीएफओ अब मिशन-मोड में केवाईसी (नो योर कस्टमर) सत्यापन अभियान चलाएगा, ताकि ऐसे खातों को सक्रिय कर कर्मचारियों और उनके परिजनों को उनका हक मिल सके।
डॉ. मांडविया ने बताया कि वर्षों से नौकरी बदलने, जानकारी के अभाव या दस्तावेजों में त्रुटि के कारण लाखों ईपीएफ खाते निष्क्रिय हो गए हैं। इनमें जमा राशि होते हुए भी लाभार्थी क्लेम नहीं कर पा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य है कि हर योग्य व्यक्ति तक उसका पैसा पहुंचे और किसी को भी अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
उन्होंने कहा कि मिशन-मोड केवाईसी के तहत आधार, पैन, बैंक खाते और मोबाइल नंबर जैसे जरूरी विवरणों का सत्यापन तेजी से किया जाएगा। इसके साथ ही ईपीएफओ एक विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च करने जा रहा है, जिससे सही दावेदार को आसान क्लेम फाइलिंग और बिना किसी परेशानी के सेटलमेंट की सुविधा मिलेगी। यह प्लेटफॉर्म यूजर-फ्रेंडली होगा, ताकि पहली बार ईपीएफ का उपयोग करने वाले और डिजिटल सिस्टम से कम परिचित लोग भी आसानी से इसका लाभ उठा सकें।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाएगी। क्लेम की स्थिति की रियल-टाइम ट्रैकिंग, दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। इससे न केवल लंबित मामलों में कमी आएगी, बल्कि ईपीएफओ पर लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।
डॉ. मांडविया ने कर्मचारियों और नियोक्ताओं से अपील की कि वे अपने ईपीएफ खातों की जानकारी नियमित रूप से अपडेट रखें और केवाईसी प्रक्रिया पूरी करें। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘डिजिटल इंडिया’ की दिशा में एक अहम कदम है, जिससे करोड़ों कर्मचारियों को सीधे लाभ मिलेगा और उनकी सामाजिक सुरक्षा और अधिक सशक्त होगी।

















