प्रयागराज, 17 मार्च 2026। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों में हो रही देरी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से स्पष्ट जवाब मांगा है कि क्या वह संवैधानिक समयसीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कर पाने की स्थिति में है या नहीं। इसके साथ ही कोर्ट ने 26 मई 2026 से पहले चुनाव कार्यक्रम का विस्तृत शेड्यूल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया। याचिका में मांग की गई थी कि पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से संचालित करने के लिए पहले से स्पष्ट कार्यक्रम तय कर उसे सार्वजनिक किया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार की अनिश्चितता न रहे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव तैयारियों की धीमी प्रगति पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि पंचायत चुनाव लोकतंत्र की बुनियादी इकाई हैं और इनमें देरी संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी मानी जाएगी। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देशित किया कि वह चुनाव की सभी आवश्यक तैयारियों, जैसे मतदाता सूची, आरक्षण प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं की स्थिति स्पष्ट करे।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि यदि किसी कारणवश देरी हो रही है, तो उसके पीछे के कारणों को विस्तार से बताया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो और चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।
जनहित याचिका में यह भी उल्लेख किया गया था कि पंचायत चुनाव में देरी से स्थानीय शासन व्यवस्था प्रभावित होती है और ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी असर पड़ता है। इस पर अदालत ने सहमति जताते हुए कहा कि पंचायतों का समय पर गठन लोकतांत्रिक ढांचे के लिए अत्यंत आवश्यक है।
अब राज्य निर्वाचन आयोग को निर्धारित समय के भीतर अपना पक्ष और विस्तृत चुनाव कार्यक्रम अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट आयोग के जवाब का परीक्षण करेगा और आवश्यकता पड़ने पर आगे के निर्देश जारी कर सकता है।

















