नई दिल्ली, 23 जनवरी 2026। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो शांति बोर्ड बनाया है, भारत ने उससे किनारा कर लिया। डोनाल्ड ट्रंप ने इस शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को न्यौता भेजा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उस न्यौते को न तो स्वीकार किया और न ही अस्वीकार। भारत की ओर से डोनाल्ड ट्रंप के आयोजन में कोई शामिल होने नहीं पहुंचा।
श्री ट्रंप ने 22 जनवरी को दावोस में चल रहे इकॉनमिक फोरम की बैठक में शांति बोर्ड का अनावरण किया। उस समय मंच पर अर्जेंटीना और हंगरी सहित 19 देशों के नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों का समूह एकत्र हुआ। उन सभी ने संस्था के संस्थापक चार्टर पर अपने हस्ताक्षर किए।
मूल रूप से हमास और इज़राइल के बीच युद्ध के बाद गाजा में शांति की देखरेख के लिए गठित इस बोर्ड के चार्टर में अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने में एक व्यापक भूमिका की परिकल्पना की गई है। इससे यह चिंता पैदा हो गई है कि श्री ट्रंप इसे संयुक्त राष्ट्र के प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
फ्रांस और ब्रिटेन ने भी इस बोर्ड में शामिल होने से किनारा कर लिया है। मंच पर मौजूद सदस्यों में से अधिकांश के ट्रंप के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। इनमें हंगरी के विक्टर ओर्बन और अर्जेंटीना के जेवियर मिलेई शामिल रहे।
बहरीन, मोरक्को, आर्मेनिया, अजरबैजान, बुल्गारिया, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, पाकिस्तान, पैराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान और मंगोलिया के अधिकारियों ने भी इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी वहां मौजूद नहीं थे। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने समारोह में कहा कि बोर्ड का मुख्य ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि गाजा में यह शांति समझौता स्थायी हो जाए।

















