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वर्णिका शर्मा की सख्ती से 10 माह बाद खुला शिक्षा विभाग का पोर्टल

वर्णिका शर्मा की सख्ती से 10 माह बाद खुला शिक्षा विभाग का पोर्टल, बच्चे को मिला प्रवेश

रायपुर, 23 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत एक अहम प्रकरण में त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए जरूरतमंद वर्ग के एक बच्चे को 10 माह बाद नि:शुल्क प्रवेश दिलाया। इतना ही नहीं जमा की गई पूरी फीस भी वापस करवाई।

आयोग के हस्तक्षेप से शिक्षा विभाग का पोर्टल दोबारा खुलवाया गया, जिससे बच्चे का नाम आरक्षित नि:शुल्क सीट में दर्ज किया जा सका। मामला उस समय सामने आया जब एक पालक ने अपने बच्चे के लिए अनिवार्य एवं नि:शुल्क शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत एक प्रतिष्ठित निजी विद्यालय में आवेदन किया था।

अप्रैल माह में प्रथम चरण की लॉटरी में बच्चे का चयन भी हो गया था। विद्यालय प्रबंधन ने यह कहते हुए प्रवेश नहीं दिया कि पालक ने संपर्क नहीं किया, जबकि नोडल अधिकारी ने फोन न उठाने की दलील पेश की।

स्थिति से अनभिज्ञ पालक ने अपने बच्चे का भविष्य देखते हुए उसी विद्यालय में 16 हजार रुपये शुल्क देकर सशुल्क प्रवेश दिला दिया। बाद में जब उसे नि:शुल्क चयन की जानकारी मिली, तो लगभग 10 माह बाद उसने छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

आयोग ने मामले की सुनवाई कर शिक्षा विभाग को तत्काल पोर्टल खोलने और बच्चे को आरक्षित नि:शुल्क सीट में दर्ज करने के निर्देश दिए, ताकि उसे आगे की पढ़ाई में भी मुफ्त शिक्षा का लाभ मिलता रहे। साथ ही विद्यालय को आदेशित किया गया कि ली गई पूरी राशि पालक को लौटाई जाए।

23 फरवरी 2026 को आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की उपस्थिति में विद्यालय ने 16,000 रुपये का अकाउंट पेयी चेक पालक को सौंपा। अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने स्पष्ट कहा कि बच्चों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने अपने आदेश में बच्चे को नि:शुल्क प्रवेश का पूर्ण हकदार मानते हुए यह कार्रवाई की।