तेहरान, 1 मार्च 2026। दुनिया के मध्य पूर्व में सियासत का केन्द्र रहे ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की हुकुमत का फरवरी 2026 के अंतिम दिन अंत हो गया। वे पिछले 36 साल तक ईरान में सुप्रीम लीडर बने रहे। इजरायल और अमेरिका के हमले में उन्हें मार गिराया गया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल-अमेरिका ने जब तेहरान स्थित खामेनेई के परिसर पर मिसाइलें गिरानी शुरू की, तब वह अपने आवास में बने हुए ऑफिस में ही बैठे थे। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई शनिवार 28 फरवरी 2026 की सुबह अपने घर के ऑफिस में बैठे थे। उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि इजरायल और अमेरिका हमला करने वाला है।
इजरायल और अमेरिका को यह पता था कि खामेनेई कहां हैं, इसलिए उनके घर ऑफिस और ईरान के राष्ट्रपति भवन के पास मिसाइलों से हमला किया गया। हमले के वक्त खामनेई अपने घर के ऑफिस में बैठे थे, तभी मिसाइल आकर गिरी और पूरा आसमान काला धुआं से भर गया। इस मिसाइल हमले में तेहरान स्थित खामनेई का परिसर पूरी तरह से नष्ट हो गया। इस भयानक हमले के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत हो गई।
अयातुल्ला अली खामेनेई 36 सालों से ईरान की सत्ता संभाले हुए थे। खामेनेई केवल एक धार्मिक नेता नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति बनाने में भी कुशल थे। 1963 में जेल की यातनाओं से निकलकर खामेनेई ने खुद को ईरान के सुप्रीम लीडर के पद तक पहुंचाया।
1989 में अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद अयातुल्ला अली खामेनेई ही ईरान के सुप्रीम लीडर बने थे। अब 36 साल बाद उनकी मृत्यु के बाद ईरान की सत्ता में परिवर्तन देखा जाएगा। ईरान में शाह के शासन के दौरान साल 1963 में खामेनेई को जेल में डाला गया था। खामेनेई को जेल में काफी प्रताड़ित किया गया। ईरानी क्रांति के बाद खामेनेई सत्ता की राह पर चल पड़े और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के शासन के दौरान वे उप रक्षा मंत्री बनाए गए।
1980-88 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान खामेनेई सुरक्षा बलों के संपर्क में ज्यादा रहे। तेहरान की अबूजर मस्जिद में जून 1981 में हुए टेप रिकॉर्डर बम से खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए। खामेनेई का दाहिना हाथ लकवाग्रस्त हो गया था और उन्हें एक कान से सुनाई देना भी बंद हो गया था।
इस हमले के बाद खामेनेई ईरान के मसीहा के तौर पर सामने आए। इस हमले में उनकी छवि और भी ज्यादा निखर कर सामने आई। ईरान के उस समय के सुप्रीम लीडर रूहोल्लाह खुमैनी के समर्थन से खामेनेई ईरान के राष्ट्रपति चुने गए।
जून 1989 में अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु हो गई थी। इनकी मृत्यु के बाद असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स (धार्मिक विद्वानों की एक परिषद) ने अली खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना। तब से वे ईरान की हुकूमत के बादशाह बने रहे।















