प्रतापगढ़, 25 मई 2025। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक सुखद और गौरवपूर्ण खबर सामने आ रही है। इस वर्ष जिले से 10 टन आम का निर्यात होने जा रहा है, जो न केवल स्थानीय किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतापगढ़ के आम की सुगंध और स्वाद को एक नई पहचान दिलाने जा रहा है।
जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस बार जिले में आम की खेती ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। अरुणिमा, मल्लिका, सूर्या और आम्रपाली जैसी उन्नत प्रजातियों के आम के बागों का क्षेत्रफल इस वर्ष 250 हेक्टेयर बढ़ा है, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
प्रतापगढ़, जिसे कभी केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित माना जाता था, अब अपने स्वादिष्ट और सुगंधित आमों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जगह बना रहा है। इस बार अमेरिका, इंग्लैंड, मलेशिया, पोलैंड, हंगरी और जर्मनी जैसे देशों में प्रतापगढ़ के आम की मांग बढ़ी है। यह उपलब्धि न केवल जिले के किसानों की मेहनत और लगन का परिणाम है, बल्कि सरकार और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से बागवानी क्षेत्र में किए गए नवाचारों और सुधारों का भी प्रमाण है।
जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि इस वर्ष जिले में आम की खेती का क्षेत्रफल बढ़कर 250 हेक्टेयर हो गया है। इसमें अरुणिमा, मल्लिका, सूर्या और आम्रपाली जैसी हाइब्रिड और उच्च गुणवत्ता वाली प्रजातियों की बागवानी को बढ़ावा दिया गया है।
प्रतापगढ़ के आम अपनी अनूठी सुगंध और स्वाद के लिए जाने जाते हैं। इस वर्ष जिले के किसानों ने हाइब्रिड प्रजातियों पर विशेष ध्यान दिया है, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। कुंडा तहसील के शेखपुर आशिक गांव के किसान लल्लू सिंह उन प्रगतिशील किसानों में से एक हैं, जिन्होंने 30 बीघे जमीन पर हाइब्रिड आम की बागवानी शुरू की है।
उनकी मेहनत रंग लाई और इस वर्ष उनके बाग में फल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों ही उत्कृष्ट रही। लल्लू सिंह ने बताया, पिछले कुछ वर्षों से हमने वैज्ञानिक तरीकों और उन्नत तकनीकों का उपयोग किया है। इस बार फल इतने अच्छे आए हैं कि विदेशों से भी ऑर्डर मिल रहे हैं। उनकी तरह ही जिले के कई अन्य किसानों ने भी आधुनिक बागवानी तकनीकों को अपनाया है, जिससे न केवल उत्पादन बढ़ा है, बल्कि आम की गुणवत्ता भी वैश्विक मानकों के अनुरूप हुई है।
प्रतापगढ़ के आम की मांग इस बार अमेरिका, इंग्लैंड, मलेशिया, पोलैंड, हंगरी और जर्मनी जैसे देशों में देखी जा रही है। इन देशों में आम की सुगंध और स्वाद को खूब पसंद किया जा रहा है। जिला उद्यान अधिकारी के अनुसार, इस वर्ष 10 टन आम का निर्यात होने की उम्मीद है, जो जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसके पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं, जिनमें किसानों की मेहनत, सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सब्सिडी, उन्नत बीजों का उपयोग, और निर्यात के लिए बेहतर लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग सुविधाएं शामिल हैं।
निर्यात के लिए आम की पैकेजिंग और परिवहन में विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि फल ताजा और आकर्षक स्थिति में विदेशी बाजारों तक पहुंच सकें। इस उपलब्धि का सबसे बड़ा लाभ जिले के किसानों को मिल रहा है। आम की खेती से न केवल उनकी आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी सुधार हो रहा है। लल्लू सिंह जैसे किसान, जो पहले स्थानीय बाजारों तक सीमित थे, अब वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
प्रतापगढ़ के आम के निर्यात से न केवल किसानों को लाभ हो रहा है, बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है। निर्यात से होने वाली आय से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं। कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग, और परिवहन क्षेत्र में नए रोजगार सृजित हुए हैं, जिससे युवाओं को अपने ही जिले में काम मिल रहा है। इसके अलावा, जिले की पहचान अब एक प्रमुख बागवानी केंद्र के रूप में बन रही है, जिससे पर्यटन और अन्य संबंधित उद्योगों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
प्रतापगढ़ जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं, ने किसानों को आधुनिक संसाधनों तक पहुंच प्रदान की है। इसके अलावा, निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यशालाएं और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए हैं, जिनमें किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांगों और मानकों के बारे में बताया गया।
जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने कहा, हमारा लक्ष्य प्रतापगढ़ को आम उत्पादन का एक वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके लिए हम किसानों को हरसंभव सहायता प्रदान कर रहे हैं। अगले कुछ वर्षों में हम निर्यात को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
प्रतापगढ़ के आम की इस सफलता ने भविष्य के लिए कई नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह के प्रयास जारी रहे, तो अगले पांच वर्षों में जिले से आम का निर्यात 20 टन तक पहुंच सकता है। इसके लिए जिले में और अधिक कोल्ड स्टोरेज इकाइयों, बेहतर परिवहन सुविधाओं, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विपणन रणनीतियों की आवश्यकता होगी। साथ ही, जैविक खेती और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाने से न केवल उत्पादन की गुणवत्ता बनी रहेगी, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा।













