रायपुर, 14 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज चिकित्सा जगत की आधुनिकतम तकनीकों पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। हैदराबाद के प्रतिष्ठित यशोदा हॉस्पिटल्स के वरिष्ठ कंसल्टेंट (इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी एवं स्लीप मेडिसिन) डॉ. विश्वेश्वरन बालासुब्रमणियन ने मीडिया से चर्चा करते हुए फेफड़ों के रोगों और स्लीप डिसऑर्डर के बढ़ते खतरों के प्रति आगाह किया। उन्होंने बताया कि कैसे ECMO और लंग ट्रांसप्लांट जैसी तकनीकें अब जीवन रक्षक साबित हो रही हैं।
बदलती जीवनशैली और प्रदूषण बना रहे बीमार
डॉ. विश्वेश्वरन ने कहा कि बढ़ता वायु प्रदूषण और अनियमित दिनचर्या फेफड़ों के लिए काल बन रही है। उन्होंने मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
- आम बीमारियां: अस्थमा, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं।
- स्लीप डिसऑर्डर: ‘स्लीप एपनिया’ और नींद में बार-बार रुकावट को लोग अक्सर सामान्य समझकर टाल देते हैं, जो भविष्य में गंभीर हृदय रोगों का कारण बन सकता है।
- समय पर पहचान: यदि शुरुआती लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो जटिलताओं को रोका जा सकता है।
ECMO और इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी: जीवन बचाने की नई उम्मीद
इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी के क्षेत्र में आई क्रांति पर चर्चा करते हुए डॉ. बालासुब्रमणियन ने बताया कि अब ब्रोंकोस्कोपी जैसी उन्नत प्रक्रियाओं से फेफड़ों की सटीक जांच संभव है।
- अत्यंत गंभीर मरीजों के लिए ECMO (Extra-Corporeal Membrane Oxygenation) एक वरदान है। यह मशीन कृत्रिम फेफड़ों की तरह काम करती है, जो शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे मरीज के फेफड़ों को रिकवरी का समय मिलता है।
- उन्होंने बताया कि अंतिम चरण की बीमारियों (End-stage lung diseases) के लिए लंग ट्रांसप्लांट (फेफड़े प्रत्यारोपण) अब एक सफल और प्रभावी विकल्प बन चुका है।
यशोदा हॉस्पिटल्स के बारे में
हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल्स अपनी विश्वस्तरीय सुविधाओं के लिए जाना जाता है:
- विशाल नेटवर्क: सोमाजीगुड़ा, सिकंदराबाद, मल्कपेट और हाईटेक सिटी में शाखाएं।
- क्षमता: 4000+ बेड्स और 700+ विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम।
- विशेषज्ञता: लिवर, हार्ट, मल्टी-ऑर्गन और बोन मैरो ट्रांसप्लांट के साथ कैंसर और कार्डियक केयर में अग्रणी।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
- नियमित व्यायाम करें और धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाएं।
- लगातार खांसी, सांस फूलना या सोते समय तेज खर्राटे आने पर तुरंत विशेषज्ञ से मिलें।
- स्वच्छ वातावरण और संतुलित आहार को प्राथमिकता दें।

















