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स्वयं सहायता समूह के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराएगा डाक विभाग

नई दिल्ली, 8 जनवरी 2026। स्वयं सहायता समूहों के लिए अच्छी खबर है। डाक विभाग अब उनके उत्पादों को बाजार तक पहुंचाएगा। यानि घर बैठे स्वयं सहायत समूह अपने उत्पादों को डाक विभाग के माध्यम से बाजार तक पहुंचा सकेंगे। 7 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में डाक विभाग और ग्रामीण विकास मंत्रालय ने आपस में एमओयू किया। इस मौके पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान उपस्थिति रहे।

डाक विभाग के पास 15 लाख से अधिक ग्रामीण डाकघर, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) और लगभग 24 लाख ग्रामीण डाक सेवकों का व्यापक नेटवर्क है। इस साझेदारी का उद्देश्य देश भर में ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और सामुदायिक संस्थानों के लिए वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना, उद्यमिता को प्रोत्साहित करना, डिजिटल क्षमताओं को मजबूत करना और बाजार तक पहुंच में सुधार करना है।

एमओयू के तहत, आईपीपीबी अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से घर बैठे बैंकिंग सेवाएं प्रदान करेगा। इसमें बचत, भुगतान और धन हस्तांतरण शामिल हैं। स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के सदस्यों को और सशक्त बनाने के लिए, इलेक्ट्रॉनिक टैबलेट और प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि डिजिटल लेनदेन सुगम हो सकें। नकद भुगतान को बढ़ावा मिले और जमीनी स्तर पर रिकॉर्ड रखने में सुधार हो सके। एसएचजी सदस्यों को प्रमाण पत्र भी जारी किए जाएंगे ताकि उनकी भागीदारी को औपचारिक रूप से मान्यता दी जा सके। वित्तीय एवं बाजार संबंधों के लिए उनकी विश्वसनीयता बढ़ाई जा सके।

डाक विभाग अपने डाक कर्मचारियों और ग्रामीण डाक सेवकों के व्यापक नेटवर्क से अंतिम छोर तक सेवा पहुंचाना सुनिश्चित करेगा। इससे दूरस्थ और कम सुविधा वाले क्षेत्रों तक भी पहुंच संभव हो सकेगी। डाक घर निर्यात केंद्रों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के लिए बाजार पहुंच को मजबूत किया जाएगा, जिससे ग्रामीण उद्यमों के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विपणन और निर्यात के अवसर सुगम होंगे।

इस सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में आधार कार्ड नामांकन और अद्यतन गतिविधियों को भी समर्थन मिलेगा, जिससे ग्रामीण विकास मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों का सत्यापन आसान हो जाएगा। डाक जीवन बीमा (पीएलआई) और ग्रामीण डाक जीवन बीमा (आरपीएलआई) को बढ़ावा देकर बीमा कवरेज का विस्तार किया जाएगा, जिसमें स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को बीमा एजेंट के रूप में काम करने के अवसर भी शामिल होंगे।

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में महिलाओं को बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट के रूप में शामिल करके और उन्हें प्रशिक्षण देकर क्षमता निर्माण में और अधिक सहयोग देगा, जिससे आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे, साथ ही ग्रामीण समुदायों में वित्तीय साक्षरता बढ़ेगी और डिजिटल रूप को अपनाने में तेजी आएगी।