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खैरागढ़ के नरेंद्र सोनी ने आत्महत्या पर किया ऐतिहासिक शोध

खैरागढ़ के नरेंद्र सोनी ने आत्महत्या पर किया ऐतिहासिक शोध

रायपुर, 15 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के निवासी नरेंद्र सोनी ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश का नाम रोशन किया है। भारती विश्वविद्यालय दुर्ग के कला एवं मानविकी संकाय के अंतर्गत मनोविज्ञान विषय में उन्हें डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की गई है। यह छत्तीसगढ़ राज्य में मनोविज्ञान विषय पर दी गई पहली पीएचडी है, जो आत्महत्या जैसी गंभीर सामाजिक समस्या पर केंद्रित है।

यह शोध आत्महत्या के सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और विधिक पहलुओं के समग्र अध्ययन पर आधारित है। शोध में आत्महत्या के प्रमुख कारणों, मानसिक दबाव, पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों, आर्थिक तनाव तथा कानूनी प्रावधानों का गहन विश्लेषण किया गया है। यह अध्ययन न केवल अकादमिक जगत के लिए उपयोगी है, बल्कि समाज के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में नरेंद्र सोनी को पीएचडी की उपाधि प्रदान की। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि इस प्रकार का शोध समाज की ज्वलंत समस्याओं को समझने और उनके समाधान की दिशा में ठोस आधार प्रदान करता है। मंत्री ने इसे राज्य के लिए गर्व का विषय बताया।

विश्वविद्यालय प्रबंधन और शोध पर्यवेक्षकों ने भी इस उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह शोध भविष्य में नीति निर्धारण, काउंसलिंग सेवाओं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा।

नरेंद्र सोनी ने अपने शोध के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि भारत में आत्महत्या एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार देश में प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख 80 हजार लोगों की मृत्यु आत्महत्या के कारण होती है। यह देश में मृत्यु के कारणों में चौथे स्थान पर है। इनमें स्कूली बच्चों, किशोरों और युवाओं की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक है।

उन्होंने कहा कि उनका शोध विशेष रूप से युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने का माध्यम बनेगा। मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने, समय पर परामर्श लेने और कानूनी जानकारी बढ़ाने से आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है।