प्रतापगढ़, 17 नवंबर 2025। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कहला गांव के प्रसिद्ध लोकनाट्य कलाकार और मास्टर के नाम से चर्चित दयाराम पटेल 17 नवंबर की शाम इस दुनिया को अलविदा कह गए। अपनी अद्भुत अभिनय कला, संवाद अदायगी और लोकनाट्य परंपरा को नई दिशा देने वाले नौटंकी मास्टर दयाराम पटेल के निधन ने पूरे क्षेत्र को शोकाकुल कर दिया है। लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित चल रहे पटेल सोमवार शाम खामोश हो गए, जिससे उनके चाहने वालों और कला प्रेमियों के बीच गहरा दुख छा गया है।
दयाराम पटेल का नाम पूर्वांचल की नौटंकी कला का पर्याय माना जाता था। कहला गांव के इस अद्भुत कलाकार ने अपने दशकों लंबे करियर में अनगिनत नाट्य प्रस्तुतियाँ कीं, जिनमें सामाजिक, ऐतिहासिक और भावनात्मक विषयों को मंच पर जीवंत किया। उनकी प्रस्तुतियों के संवाद, अभिनय और गायन का अंदाज़ दर्शकों को बांधकर रखता था। वे न केवल कलाकार थे बल्कि लोकसंस्कृति के संरक्षक भी माने जाते थे। नौटंकी के मंच पर उनका उतरना किसी उत्सव से कम नहीं होता था और उनकी लोकप्रियता सीमाओं से आगे तक फैली हुई थी।
कहला ग्राम पंचायत में प्रधान के रूप में उन्होंने गांव के विकास कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने, जरूरतमंदों की सहायता करने और ग्राम सुधार के कई कार्यों में वे हमेशा सक्रिय रहे। उनकी सादगी, सहजता और मिलनसार स्वभाव के कारण वे आम जनता में बेहद प्रिय थे।
पिछले कुछ महीनों से वे स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और लगातार उपचार चल रहा था। लेकिन सोमवार की शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर जैसे ही गांव और आसपास के क्षेत्रों में फैली, लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। घर के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और हर किसी ने एक दिग्गज कलाकार को खोने की पीड़ा व्यक्त की।
स्थानीय कलाकारों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने कहा कि दयाराम पटेल का जाना केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि नौटंकी और लोककला की एक मजबूत धरोहर का खोना है। उनके योगदान को याद करते हुए लोगों ने बताया कि दयाराम पटेल ने पूर्वांचल की लोकनाट्य परंपरा को जिस ऊंचाई तक पहुंचाया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।














