रायपुर, 13 अगस्त 2025। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के शंकर नगर में 15 अगस्त को पेट हेल्थ क्लीनिक का आयोजन होगा। इस क्लीनिक में कुत्तों को निशुल्क एण्टीरेबीज का टीका लगाया जाएगा और प्रकृति संरक्षण के लिए पौधों का वितरण किया जाएगा। यह कार्य डॉ. पदम जैन करेंगे।
13 अगस्त को रायपुर प्रेस क्लब में उन्होंने इस संबंध में मीडिया को जानकारी दी। डॉ. पदम जैन ने बताया कि यह टीकाकरण कार्यकम शंकर नगर स्थित अशोका टॉवर के शॉप नं-7 में होगा। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का इस बार लगातार 21 वॉ वर्ष है। इस मौके पर श्वान मालिको को फलदार पौध का वितरण भी किया जाएगा।
इस वर्ष संस्था नेचर एण्ड हेल्थ वेलफेयर सोसायटी द्वारा इस आयोजन हेतु सहयोग प्राप्त हुआ है। कार्यकम का प्रमुख उद्देश्य रेबीज के बारे में जागृति पैदा करना है। साथ ही साथ पौध वितरण के द्वारा पर्यावरण के प्रति लोगो में जागरूकता लाना यही इस टीकाकरण एवं पौध वितरण का प्रमुख उद्देश्य है।
इस दिन प्रातः 9.00 बजे से लेकर दोपहर 2.00 बजे तक कुत्तों में एण्टीरेबीज के टीके निःशुल्क पेट हेल्थ क्लीनिक शाप नं. 07, अशोका टावर, शंकर नगर में लगाए जाएगें।
क्या है रेबीज
रेबीज, एक विषाणु (वायरस) जनित लाइलाज एवं जानलेवा बिमारी है जो जंगली जानवरों, पालतु पशुओं एवं मनुष्यों को समान रूप से प्रभावित करता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनीकेबल डिसिसेज के मुताबिक भारत में प्रतिवर्ष लगभग 20000 लोग रेबीज की वजह से मौत के शिकार होते है। लगभग 18 लाख लोगो को कुत्ते या अन्य जानवर के काटने के पश्चात एण्टी रेबीज टीकाकरण होता है।
रेबीज मनुष्यों में मुख्य रूप से रेबीज ग्रस्त कुत्तों के काटने से होता है, पर उसके अलावा यह बिल्ली, जंगली पशु (लोमड़ी, सियार, चीता, आदि) तथा गाय या घोडे के काटने से भी हो सकता है। मनुष्यों में रेबीज ग्रस्त व्यक्ति से प्राप्त कार्निया या अंग प्रत्यारोपण करने पर भी रेबीज हो सकता है। इन सबके अलावा खुले घाव, मुंह या गेस्ट्रीक अल्सर रेबीज ग्रस्त जानवर, की लार के संपर्क में आने पर रेबीज होने की संभावना रहती है।
यह वायरस मुख्य रूप से दिमाग (ब्रेन) को प्रभावित करता है, दिमाग में सूजन होने के बाद इसके लक्षण दिखाई पड़ने लगते है। मनुष्यों में रेबीज के प्राथमिक लक्षण बिल्कुल लू की तरह होते है जिसमें सिरदर्द, हल्का बुखार, कॅपकपी एवं कभी-कभी उल्टी के रूप में परिलक्षित होता है। बाद में रेबीज ग्रस्त व्यक्ति पानी, तेज आवाज, तेज रोशनी से भी डरने लगता है, तेज आवाजे निकालता है, धीरे से शरीर के विभिन्न हिस्सों में पक्षाघात एवं अंत में मौत हो जाती है।
कुत्तों में रेबीज के लक्षण
कुत्तों में रेबीज के लक्षण दो तरह के दिखाई पड़ते है, एक में कुत्ता पूरी तरह शांत हो जाता है, पर दूसरे तरह के लक्षण वाले रेबीज में कुत्ता बहुत ही आक्रामक हो जात है। मुंह से लार टपकाते रहता है, बिना वजह लम्बी दूरी की यात्रा करना एवं किसी भी अदृश्य वस्तु को देख कर भौंकना एवं रोना आदि लक्षण प्रमुख रूप से दिखाई पडते है। रेबीज की रोकथाम में लक्षण की जानकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है, यदि कोई भी कुत्ता इन लक्षणों के साथ दिखता है तो हमे शीघ्रातिशीघ्र नगर निगम या नगर पालिका या संबंधित व्यक्ति को तुरंत सूचित करना चाहिए।
रेबीज लाइलाज बीमारी
इस आधुनिक युग में भी रेबीज लाइलाज बीमारी है, और एक बार रेबीज हो जाने पर मौत निश्चित है अतएव रेबीज से बचाव ही इससे बचने का तरीका है। बचाव के तरीकों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, पालतु जानवरों, प्रमुख रूप से कुत्ते एवं बिल्लियों का प्रतिवर्ष एण्टी रेबीज टीकाकरण करवाएं। इसके अलावा प्राथमिक उपचार की जानकारी हमे रेबीज से बचने में मदद कर सकता है।
सलाह
पालतू या जंगली जानवर काट लेने पर तो सर्वप्रथम घर पर प्राथमिक उपचार अवश्य ही करना चाहिए। प्राथमिक उपचार के लिए काटे गए स्थान को सर्वप्रथम बहते हुए पानी से करीब 10 मिनट तक लगातार धोना है, इसके लिए साबुन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। घाव को धोने की प्रक्रिया जितनी जल्दी हो सके उतना अच्छा हैं। तत्पश्चात धुले कटे स्थान पर टिंचर आयोडिन या स्पिरीट लगाना चाहिए।
कभी भी कटे हुए स्थान पर चायपत्ती या मिर्च नहीं लगाना चाहिए और न ही घाव को किसी भी प्रकार के केमीकल से जलाना चाहिए। प्राथमिक उपचार के पश्चात् अतिशीघ्र चिकित्सक की सलाह अनुसार एण्टी रेबीज टीकाकरण एवं एण्टी सीरम का प्रयोग कना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा एण्टी रेबीज टीकावीकरण हेतु जारी दिशा निर्देश दिया जा रहा है, जिसकी सहायता से टीकाकरण में मदद ली जा सकती है।














