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सोमनाथ की रक्षा में वीर हमीरजी गोहिल ने दी थी प्राणों की आहुति, पीएम मोदी ने किया याद

नई दिल्ली, 11 जनवरी 2026। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतिम दिन का वह क्षण अत्यंत भावुक होने का था जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वीर हमीरजी गोहिल की प्रतिमा को नमन करने पहुंचे।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतिम दिन 11 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर परिसर में वीर हमीरजी गोहिल की प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वीर हमीरजी गोहिल, जो मात्र 16 वर्ष की आयु में सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर गए थे। वीर हमीरजी गोहिल भारतीय इतिहास के उन अमर योद्धाओं में से एक हैं जिन्होंने आस्था और देशभक्ति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।

1299 ईस्वी में तत्कालीन दिल्ली सल्तनत के सेनापति ज़फर खान ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था। उस समय युवा राजपूत सरदार हमीरजी गोहिल, अर्थिला (लाठी) के गोहिल वंश के सबसे छोटे पुत्र, ने अपने कुछ साथियों और स्थानीय भील योद्धा वेगदाजी के साथ मिलकर आक्रमणकारियों का डटकर मुकाबला किया था।

शाम की आरती के दौरान उन्होंने आग के तीर, उबलता तेल और पत्थरों से दुश्मन को रोकने की रणनीति अपनाई। कई दिनों तक चले इस असमान युद्ध में हमीरजी और उनके साथी अंत तक लड़े। किंवदंती है कि युद्ध के अंतिम क्षणों में ज़फर खान के प्रहार से हमीरजी का सिर धड़ से अलग होकर शिवलिंग पर गिरा, फिर भी उनका धड़ लड़ता रहा। इस बलिदान के बाद आक्रमणकारी पीछे हटे और मंदिर की रक्षा हुई।

यह घटना सोमनाथ के इतिहास में अटूट आस्था और बलिदान का प्रतीक है। वीर हमीरजी की समाधि और घोड़े पर सवार उनकी भव्य प्रतिमा आज भी मंदिर के प्रवेश द्वार पर खड़ी है। यह प्रतिमा हर आने वाले तीर्थयात्री को उनके साहस और त्याग की याद दिलाती है। उनकी वीरता पर आधारित गुजराती फिल्में और लोककथाएं आज भी जीवित हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि वीर हमीरजी जैसे नायकों का बलिदान ही हमारी सभ्यता की रीढ़ है। उन्होंने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, ऐसे वीरों की गाथा हमें सिखाती है कि आस्था और मातृभूमि के लिए जीवन भी न्योछावर किया जा सकता है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व ऐसे ही अमर बलिदानियों को नमन करने का अवसर है।