• Home
  • छत्तीसगढ़
  • खैरागढ़ का प्रधानपाठ बैराज बदहाल, तीन गेट टूटे पड़े
खैरागढ़ का प्रधानपाठ बैराज बदहाल, तीन गेट टूटे पड़े

खैरागढ़ का प्रधानपाठ बैराज बदहाल, तीन गेट टूटे पड़े

खैरागढ़, 18 अगस्त 2025। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में आमनेर नदी पर 60 करोड़ रुपये की लागत से बना प्रधानपाठ बैराज आज बदहाली का प्रतीक बन चुका है। कभी किसानों की जीवनरेखा कहलाने वाला यह बैराज अब भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गया है।

इसके तीन गेट टूटे पड़े हैं, और एकमात्र बचा गेट भी किसी भी वक्त ध्वस्त हो सकता है। 26 जुलाई 2025 की भीषण बाढ़ ने खैरागढ़ और आसपास के गांवों में तबाही मचाई, जिसमें हजारों लोग प्रभावित हुए, फसलें बर्बाद हुईं, घर डूबे, और एक युवक की जान चली गई।

इस त्रासदी ने बैराज की जर्जर स्थिति और प्रशासन की उदासीनता को उजागर किया है। सवाल उठ रहे हैं कि अगर गेट टूटा था तो उसे खोला कैसे गया, और अगर खुला था तो बाढ़ क्यों आई? जवाब किसी के पास नहीं। स्थानीय विधायक श्रीमती यशोदा नीलांबर वर्मा के निर्देश पर मिशन संडे की टीम ने संयोजक मनराखन देवांगन के नेतृत्व में बैराज का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान जो दृश्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। मनराखन देवांगन ने बताया कि करोड़ों की लागत से बनी यह संरचना अब बच्चों के खेल का मैदान और पिकनिक स्पॉट बन चुकी है। टूटे गेटों पर लोग झूले की तरह झूल रहे हैं, जैसे यह कोई मेला हो।

सौंदर्यीकरण के लिए लगाए गए बिजली के खंभों में रोशनी नहीं जलती, और मरम्मत के नाम पर हर साल लाखों रुपये कागजों पर खर्च दिखाए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस है। देवांगन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, प्रधानपाठ बैराज की हालत केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सरकार की लापरवाही और राजनीतिक बेरुखी का जीता-जागता सबूत है।

नेताओं के लिए विकास अब गरीब की झोपड़ी या किसान की फसल में नहीं, बल्कि उनकी ऊंची इमारतों और ऐशो-आराम में दिखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से बैराज को लूट का अड्डा बना दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि मरम्मत के लिए निकाली गई राशि कहां जाती है, कोई नहीं जानता।

किसान खेतों के लिए पानी को तरस रहे हैं, आदिवासी अपने अधिकारों के लिए भटक रहे हैं, और गरीब महंगाई व प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे हैं।

26 जुलाई की बाढ़ ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। खैरागढ़ में 19 साल बाद इतनी भीषण बाढ़ देखी गई, जिसमें आमनेर नदी ने रौद्र रूप दिखाया। एक युवक नाले में बह गया, जिसका शव 24 घंटे बाद बरामद हुआ। बाढ़ के लिए बैराज के टूटे गेटों को जिम्मेदार ठहराया गया, क्योंकि जल प्रवाह को नियंत्रित करने में असफलता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। प्रशासन ने जिम्मेदारी टालते हुए बयानबाजी की, लेकिन ठोस कार्रवाई का अभाव रहा।

जल संसाधन विभाग की लापरवाही भी सामने आई, जब यह पता चला कि डेढ़ साल से टूटे गेट की मरम्मत के लिए 2.5 करोड़ रुपये का प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुआ। मनराखन देवांगन ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते बैराज की मरम्मत और प्रबंधन में सुधार नहीं हुआ, तो यह खैरागढ़ और आसपास के गांवों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

उन्होंने कहा, टूटे गेटों को ठीक कर और उचित प्रबंधन से बाढ़ जैसी आपदाओं को रोका जा सकता है। मिशन संडे की टीम ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर स्थायी समाधान की मांग करने का निर्णय लिया है। निरीक्षण के दौरान नेता प्रतिपक्ष दीपक देवांगन, अरुण भारद्वाज, विप्लव साहू, यतेंद्रजीत सिंह, दिलीप लहरे, रविंद्र सिंह गहरवार, पूरन सारथी, शेखर दास वैष्णव, भरत चंद्राकर, भूपेंद्र वर्मा, सूरज देवांगन, उमेश साहू, यादव सारथी, आकाश सारथी, विनोद सिन्हा, हरि दर्शन ढीमर, नरेश सिन्हा, राम गोपाल वर्मा, योगेश जंघेल, चैतू राम वर्मा, और राहुल बंजारे मौजूद थे।