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शांति, संस्कार और प्रगति से ही परिवार बनता है सफल

शांति, संस्कार और प्रगति से ही परिवार बनता है सफल

रायपुर, 11 अगस्त 2025। विशेष प्रवचनमाला में उपाध्याय भगवंत युवा मनीषी मनीष सागरजी महाराज ने परिवार की सफलता का मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि सफलता तीन धुरियों शांति, संस्कार और प्रगति पर आधारित होती है। उन्होंने कहा कि हर परिवार में सुबह से शाम तक शांति का माहौल, संस्कारों का महत्व और प्रगति के लिए सहयोग होना चाहिए। जब हर सदस्य एक-दूसरे की मदद करते हैं, तो जीवन सुखमय बनता है।

वे छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में टैगोर नगर पटवा भवन में विशेष प्रवचन दे रहे हैं। उपाध्याय भगवंत ने कहा कि सेवा परिवा​रिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण सूत्र है। सेवा के अवसर से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए, क्योंकि सेवा से प्रेम और अपनापन बढ़ता है, मनमुटाव समाप्त होते हैं और कठोर दिल भी पिघल जाता है। उन्होंने बताया कि टीम भावना, भूल स्वीकारना और बलिदान की प्रवृत्ति एकता को मजबूत करती है।

उन्होंने तीन मुख्य मकसद स्पष्ट किए। पहला, शांति यानि चिंताओं को दूर कर शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना। दूसरा, संस्कार अर्थात आचार संहिता और नियमावली स्थापित करना, जिससे सुरक्षित और संगठित वातावरण बन सके। तीसरा, प्रगति जो केवल बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास के लिए भी प्रयास करना।

मनीष सागरजी महाराज ने कहा कि परिवार में रहना आभार का कारण हो, बोझ का नहीं। परिवार हमारी साधना और सकारात्मक जीवन का आधार बने। जब हर सदस्य दूसरों की प्रगति में सहायक होगा, तभी सभ्यता व संस्कृति सुदृढ़ होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभ्यता और संस्कृति की शिक्षा सबसे पहले परिवार में ही मिलती है, इसलिए परिवार में आचार संहिता और संस्कार स्थापित करना आवश्यक है।