नई दिल्ली, 28 नवंबर 2025। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष निमंत्रण पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर को भारत के दिवस के लिए स्टेट विजिट पर आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक घोषणा का दिया है। पुतिन की इस विजिट को भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है। यह विजिट ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीति में बदलाव के बीच दोनों देश अपने पारंपरिक संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया, राष्ट्रपति पुतिन का यह दौरा भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के 5 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। दोनों नेता द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। विजिट का कार्यक्रम भव्य रहेगा। 4 दिसंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति भवन में पुतिन का स्टेट वेलकम करेंगी। प्रधानमंत्री मोदी के साथ विशेष प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता होगी। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष और परमाणु सहयोग पर महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
5 दिसंबर को पुतिन रक्षा प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे और भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरे से रूस-भारत व्यापार को गति मिलेगी, जो वर्तमान में 65 बिलियन डॉलर से अधिक है। S-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी, अकाशतीर मिसाइल के सह-उत्पादन और रूस के साथ परमाणु रिएक्टर परियोजनाओं पर चर्चा होगी।
उत्तर कोरिया और चीन के साथ रूस के संबंधों पर भी बातचीत संभावित है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में SCO समिट में पुतिन से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच फोन पर 15 से अधिक बातचीत हो चुकी है। यह विजिट BRICS और G20 जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा। राजनयिक स्रोतों के अनुसार, पुतिन के दौरे से यूक्रेन संकट पर भारत की संतुलित नीति को बल मिलेगा।
भारत ने रूस से तेल आयात बढ़ाया है, जो ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। यह विजिट भारत की बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत को मजबूत करेगा। सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली में तीन स्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। भारत-रूस मित्रता सोवियत काल से चली आ रही है। 1971 युद्ध में रूस का समर्थन अविस्मरणीय है। यह विजिट दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धियों का प्रतीक बनेगी।
















