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रायपुर पहुंचे संत विज्ञान देव ने दिया आंतरिक शांति का संदेश

रायपुर पहुंचे संत विज्ञान देव ने दिया आंतरिक शांति का संदेश

रायपुर, 21 सितंबर 2025। भीतर की अनंत शक्ति का सच्चा ज्ञान स्वयं को जानने से ही प्राप्त होता है। आंतरिक शांति के अभाव से ही आज विश्व में व्याप्त अशांति का कारण बनता है। मन को साध लें, तो जीवन स्वयं सरल हो जाता है। बाहर की लड़ाइयां भीतर की हार से ही जन्म लेती हैं।

ये उद्गार स्वर्वेद कथामृत के प्रवर्तक संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज ने संकल्प यात्रा के क्रम में रायपुर के शहीद स्मारक भवन में आयोजित जय स्वर्वेद कथा एवं ध्यान साधना सत्र में व्यक्त किए। संत प्रवर श्री ने हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति अत्यंत समृद्ध है, जिसने विरासत के रूप में आध्यात्मिकता को मानव कल्याण के लिए सहज रूप में प्रदान किया है।

यह संस्कृति धर्म से लेकर मोक्ष तक की यात्रा कराती है और विश्व की आदि संस्कृति, विश्व गुरु संस्कृति के रूप में जानी जाती है। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की चतुष्टयी ही भारतीय संस्कृति का मूल आधार है। उन्होंने विहंगम योग के प्रणेता अनंत श्री सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज की तपस्या का उल्लेख करते हुए बताया कि उनकी साधना से ही स्वर्वेद जैसे अद्वितीय महाशास्त्र की प्राप्ति हुई, जो चेतन प्रकाश के रूप में अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना (क्षेत्रीय संघ चालक, मध्य भारत), वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री लता उसेंडी, रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा तथा योग आयोग अध्यक्ष रूप नारायण सिन्हा उपस्थित रहे। सत्र में ध्यान साधना से श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठे। आयोजकों ने आगामी 25-26 नवंबर 2025 को वाराणसी के स्वर्वेद महामंदिर में होने वाले महायज्ञ का आमंत्रण दिया।