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पिता का सपना ज्ञानेश्वरी के लिए सबसे बड़ी ताकत रहा

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On अगस्त 4, 2026
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रायपुर, 4 अगस्त 2026 । ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स की रजत पदक विजेता छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की वेटलिफ्टर सुश्री ज्ञानेश्वरी यादव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में कहा कि कुछ समय पहले विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंच पर पहली बार उतरते समय वह काफी दबाव और घबराहट महसूस कर रही थीं। उस समय ऐसा लग रहा था कि यह एक ऐसा मुकाबला है, जिसका अनुभव पहले कभी नहीं हुआ। हालांकि उसी अनुभव ने उन्हें सिखाया कि बड़ी प्रतियोगिताओं का सामना कैसे करना है और मानसिक रूप से स्वयं को किस तरह तैयार करना है।

ज्ञानेश्वरी ने कहा कि विश्व चैंपियनशिप से मिले अनुभव के बाद उन्होंने हर प्रतियोगिता के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार करना सीखा। किसी भी बड़े मंच पर पहुंचकर उनका लक्ष्य अपना शत-प्रतिशत प्रदर्शन देना रहता है और यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि उनके पिता का सपना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। शुरुआती दिनों में उनके पिता साइकिल से उन्हें जिम तक लेकर जाते थे। उसी दौरान उनके पिता ने उनसे कहा था कि वह स्वयं कभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच सके, लेकिन चाहते हैं कि उनकी बेटी भारत का प्रतिनिधित्व करे और तिरंगा ऊंचा लहराए।

भावुक होते हुए ज्ञानेश्वरी ने कहा कि उनके पिता ने उनके लिए अथक मेहनत की है। उन्होंने बताया कि उनके खान-पान से लेकर प्रशिक्षण तक हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान उनके पिता ने रखा। परिवार के बेहतर भविष्य और उनकी तैयारी के लिए उनके पिता रात-रात भर मेहनत करते थे। आज उनकी हर उपलब्धि के पीछे उनके पिता का त्याग, समर्पण और संघर्ष ही सबसे बड़ी प्रेरणा है।

ज्ञानेश्वरी ने कहा कि जीवन में आने वाली हर चुनौती ने उन्हें और अधिक मजबूत बनाया है। कठिन परिस्थितियों से मिले अनुभवों ने उन्हें न केवल बेहतर खिलाड़ी बनाया, बल्कि बड़े मंच पर आत्मविश्वास के साथ देश का प्रतिनिधित्व करने का हौसला भी दिया।

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