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स्टारलिंक भारत में तेज गति से देगा सैटेलाइट इंटरनेट सेवा

नई दिल्ली, 11 दिसंबर 2025। एलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को तेज गति देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। स्पेसएक्स की बिजनेस ऑपरेशंस की वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रेयर ने 10 दिसंबर को नई दिल्ली में संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात की। इस मीटिंग में पूरे देश, खासकर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में सैटेलाइट-आधारित लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को तेजी से बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्विटर (X) पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए लिखा, बिजनेस ऑपरेशंस (SpaceX) की वाइस प्रेसिडेंट @LaurenDreyer और सीनियर लीडरशिप टीम से मिलकर खुशी हुई, जिनसे पूरे भारत में सैटेलाइट-आधारित लास्ट-माइल एक्सेस को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। उन्होंने आगे कहा, जैसा कि हम PM मोदी के डिजिटल रूप से सशक्त भारत के विजन को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी देश के सबसे दूरदराज के हिस्सों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने और ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में हर नागरिक तक इंटरनेट एक्सेस को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि डिजिटल समावेशन से व्यापक विकास में तेजी आए।

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब स्टारलिंक को पिछले महीने ही भारत सरकार से बहुप्रतीक्षित ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाई सैटेलाइट सर्विसेज (GMPCS) और वी-सैट लाइसेंस मिल चुका है। कंपनी अब तेजी से ग्राउंड इक्विपमेंट इंपोर्ट, रेगुलेटरी अप्रूवल और पार्टनरशिप की दिशा में काम कर रही है।सरकारी सूत्रों के मुताबिक, स्टारलिंक अगले कुछ महीनों में चुनिंदा ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बना रही है।

कंपनी का लक्ष्य 2026 के अंत तक देश के 80% से ज्यादा भौगोलिक क्षेत्र में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना है, जहां आज भी पारंपरिक फाइबर या मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन के साथ पूरी तरह तालमेल रखते हुए स्टारलिंक भारतीय स्टार्टअप्स, टेलीकॉम कंपनियों और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध है।

इस मुलाकात से साफ है कि स्टारलिंक अब सिर्फ लाइसेंस लेने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक जमीनी स्तर पर रोलआउट की तैयारी में जुट चुकी है। आने वाले दिनों में ग्रामीण भारत की डिजिटल तस्वीर बदलने वाली यह तकनीक तेजी से साकार होती दिख रही है।