कस्बे के एक छोटे से स्कूल में पढ़ने वाला राहुल हमेशा आत्मविश्वास की कमी से जूझता था। वह पढ़ाई में अच्छा था, लेकिन उसकी अंतर्मुखी प्रकृति के कारण लोग उसे कमजोर समझते थे। स्कूल का एक लोकप्रिय लड़का, विक्रम, अक्सर राहुल का मजाक उड़ाता। वह कहता, राहुल, तुम तो हमेशा चुप रहते हो, तुममें हिम्मत ही नहीं है! ये शब्द राहुल के मन में गहरे उतर जाते, और वह खुद को कमतर समझने लगता।
एक दिन स्कूल में एक कला प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। राहुल को चित्रकला से बहुत लगाव था, लेकिन उसने कभी अपनी कला को सबके सामने नहीं रखा। विक्रम ने उसे ताना मारा, तुम चित्र बनाओगे? तुममें वो हुनर कहां! राहुल के मन में डर था, लेकिन उसकी कक्षा की शिक्षिका, श्रीमती शर्मा, ने उसका हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा, राहुल, दूसरों की बातों पर ध्यान मत दो।
अपनी ताकत को पहचानो और दुनिया को दिखाओ कि तुम क्या कर सकते हो। राहुल ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का फैसला किया। उसने रात-दिन मेहनत कर एक ऐसा चित्र बनाया, जो प्रकृति और मानवता के बीच संतुलन को दर्शाता था। प्रतियोगिता के दिन, जब उसका चित्र प्रदर्शित हुआ, सभी दंग रह गए। उसकी कला में गहराई और भावनाएं थीं, जो हर किसी का दिल छू गईं। निर्णायकों ने उसे प्रथम पुरस्कार दिया।
विक्रम, जो हमेशा उसका मजाक उड़ाता था, चुपचाप तालियां बजाने लगा। पुरस्कार लेते समय राहुल ने कहा, मैंने सीखा कि हमें उन लोगों से दूरी बनानी चाहिए जो हमारी कमियां गिनाते हैं। हमारी असली ताकत हमारी मेहनत और आत्मविश्वास में है। उस दिन से राहुल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने अपनी कला को निखारा और एक प्रसिद्ध चित्रकार बना।
इस कहानी का संदेश है कि जीवन में हमेशा ऐसे लोग होंगे जो आपकी कमियों को उजागर करेंगे, लेकिन आपको अपनी ताकत पर भरोसा रखना होगा। दूसरों की नकारात्मक बातों से दूरी बनाएं और अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ें। आत्मविश्वास और मेहनत से आप हर मुकाम हासिल कर सकते हैं।

















