प्रतापगढ़, 27 फरवरी। एक मासूम छात्र की आत्महत्या के बाद उठे सवालों ने शहर को झकझोर कर रख दिया। लेकिन इस दर्दनाक घटना के बाद साधुरी शिरोमणि इंटर कॉलेज, धनसारी के प्रधानाचार्य कृष्णमूर्ति त्रिपाठी की गिरफ्तारी ने पूरे शिक्षक समुदाय को गहरे आक्रोश में डाल दिया है। स्कूल के शिक्षकों, प्रबंधकों और संघों ने इस गिरफ्तारी को अन्याय करार देते हुए डीएम, एसपी और डीआईओएस को ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि अगर न्याय नहीं मिला तो बोर्ड परीक्षाएं बाधित हो सकती हैं।
एक दर्दनाक घटना, कई सवाल
जेठवारा थाना क्षेत्र के इस स्कूल में शिवम सिंह नाम के छात्र ने आत्महत्या कर ली। परिजनों का आरोप था कि उसने फीस न भर पाने की वजह से प्रवेश पत्र न मिलने के कारण यह कदम उठाया। उनके इस बयान ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ गुस्से की लहर दौड़ा दी और पुलिस ने प्रधानाचार्य व प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी।
लेकिन शिक्षक संगठन इसे एकतरफा कार्रवाई मानते हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आलोक कुमार शुक्ल ने प्रशासन से सवाल किया, बिना जांच किए ही गिरफ्तारी क्यों की गई? क्या अब शिक्षक समुदाय को बिना दोष सिद्ध हुए ही अपराधी मान लिया जाएगा?
शिक्षकों का गुस्सा, प्रशासन से दो टूक
संघ के सदस्यों ने अधिकारियों से मुलाकात कर यह स्पष्ट किया कि इस गिरफ्तारी से पूरे जिले के शिक्षक समाज में भय और असुरक्षा की भावना है। संघ का तर्क था कि स्ववित्त पोषित स्कूलों को सरकार की कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती और वे केवल छात्रों की फीस से संचालित होते हैं।
संघ ने तर्क दिया कि अगर यह घटना फीस से जुड़ी होती, तो सैकड़ों अन्य छात्रों को भी परीक्षा से रोका जाता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
संगठन ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही निष्पक्ष जांच नहीं हुई और प्रधानाचार्य को न्याय नहीं मिला, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अगर शिक्षक सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो शिक्षा व्यवस्था कैसे सुरक्षित रहेगी?
सवालों के घेरे में प्रशासन
शिक्षक संगठनों और प्रबंधक महासभा ने पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट किया कि
- घटना विद्यालय परिसर में नहीं हुई।
- कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।
- प्रधानाचार्य व प्रबंधक द्वारा छात्र का कोई उत्पीड़न नहीं किया गया।
- छात्र ने प्रायोगिक परीक्षा दी थी, जहां फीस की बाध्यता नहीं थी।
- अनेक छात्रों की फीस बकाया होने के बावजूद उन्हें प्रवेश पत्र दिया गया।
ऐसे में शिक्षकों ने सवाल उठाया कि बिना ठोस सबूतों के प्रधानाचार्य की गिरफ्तारी क्या सिर्फ भीड़ के दबाव में की गई?
बोर्ड परीक्षा पर असर संभव
शिक्षक संघ और प्रबंधक महासभा ने स्पष्ट कर दिया कि अगर जल्द ही प्रधानाचार्य को न्याय नहीं मिला, तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे। बोर्ड परीक्षा का संचालन प्रभावित हो सकता है, जिससे हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य पर असर पड़ेगा।