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प्रतापगढ़ में टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ सड़क पर उतरे शिक्षक, सौंपा ज्ञापन

प्रतापगढ़ में टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ सड़क पर उतरे शिक्षक, सौंपा ज्ञापन

प्रतापगढ़, 16 सितंबर 2025। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर 16 सितंबर को प्राथमिक शिक्षक संघ प्रतापगढ़ ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य करने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ जिला कलेक्ट्रेट में प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिला अधिकारी के माध्यम से सौंपा। इस अवसर पर भारी संख्या में शिक्षक और शिक्षिकाएं अंबेडकर चौराहे के पास जिला पंचायत प्रांगण में एकत्र हुए, जहां उन्होंने नारेबाजी के साथ अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। शिक्षक एकता जिंदाबाद के नारों से पूरा शहर गूंज उठा।

कार्यक्रम में प्राथमिक शिक्षक संघ प्रयागराज मंडल के मंडलीय मंत्री अनिल पांडे, जिला मंत्री विनय सिंह, जिला कोषाध्यक्ष राजेश पांडे और वरिष्ठ उपाध्यक्ष सत्य प्रकाश पांडे ने शिक्षकों को संबोधित किया। विनय सिंह ने अपने संबोधन में कहा, आज हम सभी को एक मंच पर एकजुट होने की आवश्यकता है। नियुक्ति का आधार विज्ञापन होता है, और हम सभी उसी आधार पर शिक्षक पद पर नियुक्त हुए हैं। यदि कोई नया नियम लागू होता है, तो वह उस तिथि से प्रभावी होना चाहिए। लेकिन, दुर्भाग्यवश जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो हमें स्वीकार नहीं। हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस मुद्दे पर उचित कदम नहीं उठाती, तो शिक्षक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान शिक्षकों ने एकजुटता का परिचय देते हुए अपनी मांगों को बुलंद किया। सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद टीईटी को अनिवार्य करने का नियम लागू किया गया है, जिसका शिक्षक समुदाय विरोध कर रहा है। उनका तर्क है कि पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर नए नियम लागू करना अन्यायपूर्ण है।

इस अवसर पर पंकज तिवारी, रामानंद, शैलेश सिंह, अजीत कुमार, प्रभात मिश्रा, विजय मिश्रा, वीरेंद्र यादव, पन्नालाल, बृजेश सिंह, बलराम पाठक, राकेश सिंह, मनोज पांडे, उदय शंकर, निर्भय सिंह, सुधीर मिश्रा, संतोष मिश्रा, मानवेंद्र द्विवेदी, बालेंद्र शुक्ला, धर्मेंद्र शुक्ला, विष्णु, बृजेंद्र पांडे, राजकरण, धीरेंद्र सिंह, सुशील तिवारी, मनोज मिश्रा सहित कई अन्य शिक्षक उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में महिला शिक्षिकाओं की भागीदारी ने भी इस प्रदर्शन को और मजबूती प्रदान की।

शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों के समर्थन में एकजुट हैं और यदि उनकी बात नहीं सुनी गई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। यह प्रदर्शन न केवल शिक्षकों की एकता को दर्शाता है, बल्कि उनकी मांगों की गंभीरता को भी उजागर करता है। जिला प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार किया, और अब शिक्षक समुदाय सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहा है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि शिक्षक अपनी मांगों को लेकर दृढ़ संकल्पित हैं।