17 बैंकों को अपने साथ जोड़ा और एक नया वित्तीय सुरक्षा मॉडल पेश किया
रायपुर, 3 अप्रैल 2025। छत्तीसगढ़ में रियल एस्टेट का खेल अब नए नियमों के साथ चमकने को तैयार है। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने एक ऐसा दमदार कदम उठाया है, जो न सिर्फ प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करवाएगा, बल्कि घर खरीदने वालों के सपनों को भी टूटने से बचाएगा।
राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आयोजित बैंक एम्पैनलमेंट इवेंट में रेरा ने 17 बैंकों को अपने साथ जोड़ा और एक नया वित्तीय सुरक्षा मॉडल पेश किया, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। रेरा के अध्यक्ष संजय शुक्ला ने मंच से ऐलान किया, अब खरीदारों का पैसा सुरक्षित रहेगा और रियल एस्टेट में पारदर्शिता की नई सुबह होगी।
इस मॉडल का मंत्र है-70% फंड रेरा के नामित खाते में, ताकि हर पाई प्रोजेक्ट के लिए ही खर्च हो। बाकी 30% जरूरी खर्चों के लिए। यह सुनिश्चित करेगा कि प्रमोटर फंड का दुरुपयोग न कर सकें और प्रोजेक्ट तय समय पर पूरा हो। कार्यक्रम में रेरा के सदस्य धनंजय देवांगन, रजिस्ट्रार सुश्री आस्था राजपूत, क्रेडाई छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष पंकज लाहोरी और बैंकों के जोनल हेड्स ने शिरकत की।
क्या है इस मॉडल की खासियत
अब सब कुछ सॉफ्टवेयर की नजर में होगा। निधि निकासी से लेकर आवंटन तक, हर कदम डिजिटल और पारदर्शी। मानवीय गलतियों का कोई चक्कर नहीं, क्योंकि सिस्टम खुद निगरानी करेगा। बैंकों को भी रेरा के खातों के हिसाब से ढाला गया है, ताकि लेन-देन में कोई गड़बड़ी न हो। संजय शुक्ला ने जोर देकर कहा, हमारा लक्ष्य है कि आबंटियों का निवेश सुरक्षित रहे और रियल एस्टेट में वित्तीय अनुशासन की मिसाल कायम हो।
तीनों पक्षों को फायदा होगा
इस पहल से त्रिशूल की तरह तीनों पक्षों को फायदा होगा-बैंक, प्रमोटर और खरीदार। बैंकों के लिए कागजी झंझट खत्म, क्योंकि अब दस्तावेज डिजिटल होंगे। प्रमोटरों को बार-बार कागजात जमा करने की टेंशन से छुटकारा मिलेगा और प्रोजेक्ट की रियल-टाइम अपडेट से काम आसान होगा। लेकिन सबसे बड़ा तोहफा खरीदारों के लिए है-उनका पैसा सुरक्षित, प्रोजेक्ट समय पर पूरा, और घर मिलने में देरी की चिंता खत्म।