| स्टॉकहोम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने ‘भारत के लोकतंत्र के भीतर’ विषय पर गोलमेज चर्चा का नेतृत्व किया और अंतर्राष्ट्रीय आईडीईए परिषद की अध्यक्षता संभाली। भारत की चुनावी प्रक्रिया, पैमाने और लोकतांत्रिक मजबूती पर प्रमुख विचार प्रस्तुत किए। |
स्टॉकहोम, 5 दिसंबर 2025। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्वीडन के स्टॉकहोम स्थित स्वीडिश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स में ‘भारत के लोकतंत्र के भीतर’ विषय पर एक महत्वपूर्ण गोलमेज चर्चा का नेतृत्व किया। इस कार्यक्रम में स्वीडन की पूर्व विदेश मंत्री सुश्री एन लिंडे विशेष वक्ता के रूप में उपस्थित थीं। चर्चा का मुख्य केंद्र भारत के विशाल, विविध और सुव्यवस्थित लोकतांत्रिक ढांचे को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना रहा।
अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव सहायता संस्थान (International IDEA) की परिषद के अध्यक्ष के रूप में भारत की भूमिका को एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह न केवल विश्व के सबसे विश्वसनीय और अभिनव चुनाव प्रबंधन निकायों में से एक के रूप में भारत के चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भारत ने लोकतांत्रिक शासन, वैश्विक विमर्श और संस्थागत सुधारों में निरंतर सार्थक योगदान दिया है। भारत अंतर्राष्ट्रीय आईडीईए का संस्थापक सदस्य रहा है और संगठन के विकास में उसकी भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है।
स्टॉकहोम पहुंचने पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का स्वागत स्वीडन में भारत के राजदूत अनुराग भूषण ने किया। अपने दौरे के दौरान उन्होंने आईडीईए के महासचिव डॉ. केविन कैसास-ज़मोरा से भी मुलाकात की और संगठन के भविष्य के कार्यक्रमों तथा वैश्विक लोकतांत्रिक चुनौतियों पर चर्चा की।
अपने स्वीकृति भाषण में ज्ञानेश कुमार ने भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विशाल पैमाने को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि भारत में 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में 900 मिलियन (90 करोड़) से अधिक पंजीकृत मतदाता हैं। दुनिया के किसी भी लोकतंत्र में इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का होना भारत की लोकतांत्रिक मजबूती को प्रदर्शित करता है।
चुनावों की झलक साझा की
उन्होंने 2024 के आम चुनावों की झलक साझा करते हुए बताया कि चुनाव प्रक्रिया में 6 राष्ट्रीय और 67 राज्य स्तरीय दलों सहित 743 राजनीतिक दलों के 20,000 से अधिक उम्मीदवारों ने भाग लिया। इन चुनावों के सफल आयोजन में 10 लाख से अधिक बूथ स्तर के अधिकारियों, 50 लाख से अधिक मतदानकर्मियों और कुल मिलाकर 2 करोड़ से अधिक चुनाव कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि भारत ने 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से संसद के लिए 18 आम चुनाव और राज्य विधानसभाओं के लिए 400 से अधिक आम चुनाव आयोजित किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत विश्व के सामने न केवल आधुनिक लोकतंत्र के अपने अनुभव साझा करना चाहता है, बल्कि अपनी प्राचीन सभ्यतागत विरासत में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतों को भी आगे बढ़ाना चाहता है।
आगे की दिशा स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता निर्णायक, महत्वाकांक्षी और कार्रवाई-उन्मुख होगी। उन्होंने घोषणा की कि परिषद का कार्य “समावेशी, शांतिपूर्ण, मजबूत और सतत विश्व के लिए लोकतंत्र” की थीम पर आगे बढ़ाया जाएगा। उनके नेतृत्व में दो प्रमुख स्तंभों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा भविष्य के लिए लोकतंत्र की पुनर्कल्पना और सतत लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र एवं पेशेवर चुनाव प्रबंधन निकायों को मजबूत करना।
अपने भाषण के अंत में कुमार ने कहा कि भारत यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रत्येक वोट की अहमियत बनी रहे, हर नागरिक की आवाज सुनी जाए और दुनिया भर के लोकतंत्र और अधिक शांतिपूर्ण, समावेशी और सुदृढ़ बनें।
भारत की अध्यक्षता के साथ ही मॉरीशस और मैक्सिको वर्ष 2026 के लिए अंतर्राष्ट्रीय आईडीईए परिषद के उपाध्यक्ष पद संभालेंगे, जिससे वैश्विक स्तर पर लोकतांत्रिक सहयोग के नए आयाम खुलने की उम्मीद है।