रायपुर, 20 नवंबर 2025। व्यावसायिक जीवन में तकनीकी कौशलों के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। तारवानी एंड एसोसिएट्स द्वारा आयोजित आर्टिकल स्टडी मीट में आयोजित विशेष सत्र ने इस बात को एकदम स्पष्ट कर दिया। इस सत्र में प्रमुख प्रशिक्षक रीना जोतवानी ने सॉफ्ट स्किल्स के महत्व को न केवल सहजता से समझाया, बल्कि भारतीय महाकाव्यों रामायण और महाभारत के जीवंत प्रसंगों के माध्यम से प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किए। यह सत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और आर्टिकल क्लर्क्स के लिए एक ज्ञान-प्रदाता और आत्म-चिंतन का माध्यम सिद्ध हुआ, जहां प्रतिभागियों ने न केवल नई सीख हासिल की, बल्कि अपने दैनिक जीवन में इन्हें उतारने का संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ एक स्वागतपूर्ण वातावरण में हुआ, जहां तारवानी एंड एसोसिएट्स के कार्यालय में जुटे युवा पेशेवर उत्साह से भरे नजर आए। रीना जोतवानी ने सत्र की शुरुआत एक सरल प्रश्न से की: क्या आप जानते हैं कि आपकी बातचीत में तीन ‘सी’ का जादू कैसे काम करता है? उन्होंने विस्तार से बताया कि संवाद के दौरान ‘क्लियर’ (स्पष्ट), ‘कंसाइज़’ (संक्षिप्त) और ‘कॉन्फिडेंस’ (आत्मविश्वास) को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। जब आप किसी से बात करते हैं, तो पहले यह तय करें कि आपको क्या कहना है—यह क्लियर होना चाहिए। फिर, अपनी बात को संक्षिप्त और सटीक रखें, ताकि श्रोता बोर न हो। और सबसे ऊपर, आत्मविश्वास के साथ बोलें, क्योंकि यही आपकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाता है।
यह व्याख्या इतनी सरल थी कि सत्र में उपस्थित सभी ने तुरंत नोट्स लेना शुरू कर दिए। रीना जोतवानी ने आगे सॉफ्ट स्किल्स को ‘दिल से निकलने वाले गुण’ के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये कौशल केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रीटिंग (स्वागत), बॉडी लैंग्वेज और गैर-मौखिक संचार जैसे तत्वों से जुड़े हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, सामने वाले को मुस्कान से ग्रीट करें, अपनी बॉडी लैंग्वेज से सकारात्मक ऊर्जा फैलाएं—ये छोटी-छोटी बातें बड़े परिणाम लाती हैं ।
सत्र को और अधिक रोचक बनाने के लिए उन्होंने भारतीय संस्कृति की ओर रुख किया। महाभारत के कुरुक्षेत्र के प्रसंग का हवाला देते हुए उन्होंने श्रीकृष्ण की भूमिका पर प्रकाश डाला। श्रीकृष्ण ने अर्जुन की सभी शंकाओं—चाहे वह युद्ध का भय हो या कर्तव्य की दुविधा—को अपने संयम, धैर्य और प्रभावी संचार से दूर किया। यह हमें कम्युनिकेशन, लिसनिंग और लर्निंग स्किल्स का अनमोल संदेश देता है। रीना ने उदाहरण देते हुए कहा, कृष्ण जी ने न केवल सुना, बल्कि अर्जुन के मन की गहराई को समझा और गीता के माध्यम से सीख दी ।
प्रतिभागी इस प्रसंग से इतने प्रभावित हुए कि कई ने तुरंत चर्चा शुरू कर दी। इसी क्रम में रामायण के प्रसंगों ने सत्र को और गहराई प्रदान की। हनुमान जी को सॉफ्ट स्किल्स का जीवंत प्रतीक बताते हुए रीना ने कहा, हनुमान जी की विनम्रता, अनुशासन, सम्मान और आत्मविश्वास की मिसाल लें। लंका दहन के दौरान या राम जी की खोज में उनकी भूमिका—ये सब टीमवर्क, समस्या समाधान और संवेदनशील संवाद के उदाहरण हैं। श्री राम की धैर्यपूर्ण नेतृत्व शैली ने भी दिखाया कि सॉफ्ट स्किल्स व्यक्ति का संपूर्ण व्यक्तित्व हैं—दृष्टिकोण, परिस्थितिजन्य आचरण और सकारात्मक सोच।
इन उदाहरणों ने न केवल सत्र को जीवंत बनाया, बल्कि प्रतिभागियों को अपनी जड़ों से जोड़ दिया। कई युवा पेशेवरों ने महसूस किया कि आधुनिक व्यावसायिक चुनौतियों का समाधान प्राचीन ग्रंथों में ही छिपा है।सत्र में तारवानी एंड एसोसिएट्स के प्रमुख सदस्यों और आर्टिकल क्लर्क्स ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
प्रमुख उपस्थितजनों में सीए चेतन तारवानी, सीए सिद्धांत माखीजा, सीए सुरक्षा तारवानी, अर्पना नायक, रुपाली सोनी, मुस्कान शर्मा, नाज़िया, उपासना देवनानी, तुषार सिंह राजपूत, कशिश ऐलसिंघानी, कोमल राठी, साधना साहू, मनीष असलानी, देवेश गिधवानी, मुस्कान नारा, आर्ची नानवानी, यक्षा चावला, प्रशांत माथानी, उत्कर्ष चंदक और प्रियांशु सिंह शामिल थे। इनमें से कई ने सत्र के दौरान अपने अनुभव साझा किए, जैसे कि एक आर्टिकल क्लर्क ने बताया कि कैसे क्लियर कम्युनिकेशन ने उनकी क्लाइंट मीटिंग को सफल बनाया।
कार्यक्रम की संयोजक साधना साहू ने समापन पर सभी का आभार व्यक्त किया। यह सत्र न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को व्यावसायिक जीवन से जोड़ने वाला भी। सत्र के अंत में प्रतिभागियों ने सामूहिक संकल्प लिया कि वे तीन प्रमुख सॉफ्ट स्किल्स क्लियर, कंसाइज़ और कॉन्फिडेंस को अपने दैनिक कार्य और व्यक्तिगत जीवन में अपनाएंगे। उन्होंने वादा किया कि अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे, हर कौशल को आचरण में उतारेंगे और खुद को अधिक प्रभावी, विनम्र तथा सक्षम बनाएंगे।
यह सत्र आर्टिकल स्टडी मीट का हिस्सा था, जो युवा सीए उम्मीदवारों को निरंतर सीखने का मंच प्रदान करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम न केवल पेशेवर विकास को बढ़ावा देते हैं, बल्कि सॉफ्ट स्किल्स के माध्यम से मानवीय मूल्यों को मजबूत करते हैं। तारवानी एंड एसोसिएट्स ने भविष्य में ऐसे और सत्र आयोजित करने की घोषणा की, ताकि युवा पीढ़ी भारतीय दर्शन से प्रेरित होकर वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सके। कुल मिलाकर, यह आयोजन आत्म-विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जहां प्राचीन ज्ञान और आधुनिक आवश्यकताओं का सुंदर संगम हुआ।













