मुंबई, 13 सितंबर 2025। कंगना रनौत की बहुप्रतीक्षित राजनीतिक ड्रामा फिल्म ‘इमरजेंसी’ हर घर तक सत्ता, राजनीति और देशभक्ति की गूंज पहुंचाएगी। 1975 की इमरजेंसी की पृष्ठभूमि में बनी यह कहानी उस समय की है जब लोकतंत्र पर विराम लगा दिया गया था और लोगों की आवाज़ दबा दी गई थी। यह फिल्म साहस, संघर्ष और सच्चाई की दास्तान पेश करती है। दमदार कलाकारों, शानदार अभिनय और आज भी गूंजते मुद्दों के साथ ‘इमरजेंसी’ केवल एक फिल्म नहीं बल्कि याद दिलाती है कि हम एक राष्ट्र के तौर पर कितनी दूर आ चुके हैं। 12 सितंबर को रात 8 बजे ‘इमरजेंसी’ का वर्ल्ड टीवी प्रीमियर सिर्फ ज़ी सिनेमा पर संपन्न हो गया।
यह राजनीतिक ड्रामा दिखाता है कि किस तरह प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र को निलंबित कर सेंसरशिप लागू किया। यह फिल्म उस दौर की उथल-पुथल को सामने लाती है और जयप्रकाश नारायण व अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं की बहादुरी को उजागर करती है, जिन्होंने डर और दमन के माहौल में आज़ादी और न्याय की लड़ाई लड़ी।
अनुपम खेर कहते हैं, इमरजेंसी सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उस दौर की याद है जब लोकतंत्र की असली परीक्षा हुई थी। 1975 में जब इमरजेंसी लगी, मैं नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में छात्र था, और मैंने उस खामोशी और डर को अपनी आंखों से देखा है। इस फिल्म में जयप्रकाश नारायण जी का किरदार निभाना मेरे लिए बेहद खास अनुभव रहा। वे निडर व्यक्ति थे जिन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई। मैं चाहता हूं कि हर पीढ़ी के लोग इस फिल्म को ज़रूर देखें, क्योंकि यह केवल इतिहास नहीं बल्कि एक सबक है जिसे हमें कभी नहीं भूलना चाहिए।
श्रेयस तलपड़े कहते हैं, एक एक्टर के तौर पर हर रिलीज़ से पहले घबराहट होती है और इमरजेंसी में भी वैसा ही था। अटल बिहारी वाजपेयी जी का किरदार निभाना बड़ी ज़िम्मेदारी थी, सिर्फ इसलिए नहीं कि वे कौन थे, बल्कि इसलिए भी कि दर्शकों की प्रतिक्रिया सबसे अहम होती है। मुझे गर्व है कि मैं इसका हिस्सा हूं।
कंगना रनौत द्वारा निर्देशित इस फिल्म में वे ख़ुद इंदिरा गांधी की भूमिका निभा रही हैं। साथ ही अनुपम खेर ने जयप्रकाश नारायण, श्रेयस तलपड़े ने युवा अटल बिहारी वाजपेयी और मिलिंद सोमन ने सैम मानेकशॉ का किरदार निभाया है। महिमा चौधरी और स्वर्गीय सतीश कौशिक भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नज़र आते हैं।
















