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प्रतापगढ़ में रहा ट्रेड यूनियनों के आंदोलन का असर, हुई सभा और सौंपा ज्ञापन

प्रतापगढ़ में रहा ट्रेड यूनियनों के आंदोलन का असर, हुई सभा और सौंपा ज्ञापन

प्रतापगढ़, 9 जुलाई 2025। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आंदोलन का असर प्रतापगढ़ जिले में भी देखने को मिला। बीमा एवं ग्रामीण बैंक में कर्मचारी पूर्ण रूप से हड़ताल पर रहे। राष्ट्रीय बैंकों में आल इंडिया बैंक एम्पलाइज यूनियन के सदस्य अपना वेतन कटवाकर हड़ताल पर रहे। इसी तरह बीएसएनएल, लोक निर्माण विभाग, बिजली सहित विभिन्न क्षेत्रों में एवं असंगठित क्षेत्र में भी श्रमिक हड़ताल में शामिल रहे।

जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल प्रतापगढ़ के तत्वाधान में कलेक्ट्रेट प्रतापगढ़ में एनआईसी के सामने विभिन्न कर्मचारी मजदूर संगठनों के पदाधिकारियों ने सभा की। सभा को प्रमुख रूप से आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रांतीय मंत्री एवं जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल के अध्यक्ष हेमंत नंदन ओझा, उत्तर प्रदेश बैंक एम्पलाई यूनियन के जिला अध्यक्ष नरेंद्र प्रसाद मिश्र, आंगनबाड़ी कर्मचारी संगठन के संरक्षक अनिल सिंह, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष करुणेश प्रताप सिंह, पल्लेदार मजदूर यूनियन के मंत्री महेश चंद सरोज, उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक संघ के जिला मंत्री राघवेंद्र मिश्रा, उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष विजय बहादुर सिंह, बीमा इंप्लाइज संगठन के अभिनव सिंह, राजकुमार पांडे, भारतीय दूरसंचार निगम लिमिटेड एम्पलाइज यूनियन के जिला मंत्री डी आर मिश्रा, अखिल भारतीय किसान मजदूर संगठन के जिला मंत्री विजयानंद तिवारी, राज्य कमर्चारी महासंघ के अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, लोक निर्माण विभाग मिनिस्ट्रियल फेडरेशन के अध्यक्ष संदीप सिंह, बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक एम्पलाइज यूनियन के अध्यक्ष आकाश श्रीवास्तव, महामंत्री सुनीत झा, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष राजेश मोहन मिश्रा, महामंत्री रमाशंकर तिवारी, अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष आशुतोष शुक्ला, अखिल भारतीय किसान सभा के जिला महामंत्री निर्भय प्रताप सिंह ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार श्रमिकों और कर्मचारी के आंदोलन के अधिकार को लगातार कुचलने का का काम कर रही है। श्रम कानून को समाप्त कर देश को गंभीर संकट की तरफ ले जा रही है। मजदूर और कर्मचारियों की स्थिति दिन-ब-दिन नाजुक होती चली जा रही है।

सभा के अंत में राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन सभा स्थल पर जिलाधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में उपजिलाधिकारी ने आकर ज्ञापन लिया। सभा स्थल पर वामपंथी दलों मुख्य रूप से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला मंत्री राजमणि पांडे, वरिष्ठ नेता रामबरन सिंह, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माक्सर्वादी के जिला मंत्री आशुतोष शुक्ला, एस यू सी आई के जनपद स्तरीय पदाधिकारी ने आकर कर्मचारी मजदूर संगठनों की मांगों के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की।

ज्ञापन में रखी गयी ये मांगे

  • केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए चारों श्रम संहिता को रद्द किए जाएं।
  • सभी विभागों, बैंकों, निगम और उनके अधीन संस्थानों में रिक्त पदों पर भर्ती किया जाए।
  • संविदा एवं आउटसोर्स श्रमिकों को नियमित किया जाए।
  • आउट सोर्स व्यवस्था पूर्ण रूप से समाप्त किया जाए।
  • ओल्ड पेंशन स्कीम लागू किया जाए।
  • स्कीम वर्कर्स को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
  • न्यूनतम मजदूरी 26000 रुपये लागू किया जाए।
  • ईपीएफ की सीमा 31000 रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मियों के लिए लागू किया जाए।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति को रद्द किया जाए।
  • मनरेगा की मजदूरी 2 गुना करते हुए वर्ष भर श्रमिकों को काम की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
  • पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण वापस लें।