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दुर्ग में पदस्थ वरिष्ठ आरक्षकों को आधुनिक पुलिसिंग के बारे में दी गई जानकारी

दुर्ग में पदस्थ वरिष्ठ आरक्षकों को आधुनिक पुलिसिंग के बारे में दी गई जानकारी

आईजी रामगोपाल गर्ग और एसएसपी विजय अग्रवाल ने उत्कृष्ट प्रशिक्षणार्थियों को किया पुरस्कृत

दुर्ग, 21 जून 2025। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में 16 से 20 जून 2025 तक आयोजित पांच दिवसीय वरिष्ठ आरक्षकों के अनुसंधान संबंधी प्रशिक्षण सह-कार्यशाला का समापन शनिवार, 21 जून को पुलिस नियंत्रण कक्ष, सेक्टर-6, मिलाई नगर में एक भव्य समारोह के साथ हुआ। इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज, रामगोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) विजय अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) सुखनंदन राठौर, रक्षित निरीक्षक नीलकंठ वर्मा सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

समापन समारोह में प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले वरिष्ठ आरक्षकों को पुरस्कृत किया गया, और प्रशिक्षकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जिला दुर्ग में पदस्थ वरिष्ठ आरक्षकों की अनुसंधान क्षमता को बढ़ाने और उन्हें आधुनिक पुलिस कार्यप्रणाली से परिचित कराने के उद्देश्य से किया गया था। प्रशिक्षण में सेवानिवृत्त उप पुलिस अधीक्षक अजीत यादव और राकेश जोशी ने प्रशिक्षणार्थियों को अनुसंधान की बारीकियों से अवगत कराया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रथम सूचना पत्र (एफआईआर) दर्ज करने से लेकर न्यायालय में चालान पेश करने तक की प्रक्रिया को समझाना था।

प्रशिक्षण के दौरान वरिष्ठ आरक्षकों को छोटे-छोटे प्रकरणों पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई करने का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें मारपीट के मामलों में साधारण चोट, गंभीर चोट, और प्राणघातक चोट की प्रारंभिक जानकारी, सूचना प्राप्ति, और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शामिल थी। इसके अतिरिक्त, सड़क दुर्घटना और घायल व्यक्ति की मृत्यु से संबंधित प्रकरणों में अनुसंधान की तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक उदाहरणों और केस स्टडी के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों को जटिल मामलों को सरलता से हल करने के गुर सिखाए।

उत्तम कुमार देशमुख प्रथम स्थान पर रहे

21 जून को प्रशिक्षण के समापन पर एक लिखित परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें प्रशिक्षणार्थियों ने अपनी सीख का प्रदर्शन किया। परीक्षा के परिणामों के आधार पर आरक्षक कमांक 971 उत्तम कुमार देशमुख (थाना रानीतराई) ने प्रथम स्थान, आरक्षक कमांक 1677 बी. लक्ष्मण राव (चौकी अंजोरा) ने द्वितीय स्थान, और आरक्षक कमांक 1612 श्याम सिंह राजपूत (चौकी जेवरासिरसा) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इन उत्कृष्ट प्रशिक्षणाथिर्यों को आईजी रामगोपाल गर्ग और एसएसपी विजय अग्रवाल ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

साथ ही, प्रशिक्षण देने वाले सेवानिवृत्त उप पुलिस अधीक्षक अजीत यादव और राकेश जोशी को उनके अमूल्य योगदान के लिए मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया गया। समापन समारोह में अपने उद्बोधन में आईजी रामगोपाल गर्ग ने वरिष्ठ आरक्षकों से अपील की कि वे प्रशिक्षण में सीखे गए कौशलों को अपने दैनिक कार्यों में पूरी जिम्मेदारी और उत्साह के साथ लागू करें।

उन्होंने कहा, पुलिस विभाग समाज की रीढ़ है, और आप जैसे वरिष्ठ आरक्षक इसकी नींव हैं। आपका कार्य न केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में विश्वास और सुरक्षा का भाव जगाने में भी सहायक है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन निष्ठा और समर्पण के साथ करें।

एसएसपी ने आरक्षकों का बढ़ाया उत्साह

एसएसपी विजय अग्रवाल ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी वरिष्ठ आरक्षकों को बधाई दी और कहा, यह प्रशिक्षण आपके पेशेवर कौशल को निखारने का एक अवसर था। अब आपकी जिम्मेदारी है कि आप इसे अपने कार्यक्षेत्र में लागू करें। उन्होंने यह भी घोषणा की कि अगले सप्ताह प्रशिक्षणार्थियों को पुन: बुलाकर उनके कार्यों का आकलन किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रशिक्षण का प्रभाव उनके कार्य में दिखाई दे। अग्रवाल ने प्रशिक्षकों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि उनके अनुभव और मार्गदर्शन ने प्रशिक्षण को प्रभावी बनाया।

प्रशिक्षण सह-कार्यशाला में शामिल वरिष्ठ आरक्षकों ने इस आयोजन को अत्यंत उपयोगी बताया। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले उत्तम कुमार देशमुख ने कहा, इस प्रशिक्षण ने हमें अनुसंधान की तकनीकी और कानूनी बारीकियों को समझने का अवसर दिया। अब हम अपने कार्य को और बेहतर तरीके से कर सकेंगे। इसी तरह, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले बी. लक्ष्मण राव ने कहा कि प्रशिक्षकों ने जटिल विषयों को सरल भाषा में समझाया, जिससे उनकी समझ में वृद्धि हुई।

इस प्रशिक्षण का आयोजन छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग की उस पहल का हिस्सा है, जो पुलिसकर्मियों की क्षमता वृद्धि और आधुनिक अपराधों से निपटने के लिए उन्हें सक्षम बनाने पर केंद्रित है। दुर्ग जिले में बढ़ते अपराधों और जटिल अनुसंधानों की आवश्यकता को देखते हुए इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम समय की मांग हैं। विशेष रूप से, भारतीय न्याय संहिता (बी.एन.एस.) के तहत नए कानूनी प्रावधानों को समझना और लागू करना पुलिस कमिर्यों के लिए एक चुनौती है, जिसे इस प्रशिक्षण ने संबोधित किया।

समापन समारोह में उपस्थित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर ने कहा कि इस प्रशिक्षण से वरिष्ठ आरक्षकों की कायर्कुशलता में सुधार होगा, जिसका सीधा लाभ जिले की कानून-व्यवस्था को मिलेगा। रक्षित निरीक्षक नीलकंठ वर्मा ने कार्यक्रम के सुचारु संचालन के लिए सभी कर्मचारियों और अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।