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प्रतापगढ़ में दो भाइयों ने पिता को दी अनोखी श्रद्धांजलि, हो रही सराहना…

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प्रतापगढ़, 3 अप्रैल 2025 । जिंदगी की भागदौड़ में हम अक्सर अपनों को याद करने का सही तरीका भूल जाते हैं, लेकिन प्रतापगढ़ के दो भाइयों ने अपने पिता के निधन पर ऐसा रास्ता चुना, जो न सिर्फ उनकी आत्मा को शांति देगा, बल्कि समाज के लिए भी एक मिसाल बनेगा। मंगरौरा ब्लॉक के अतरसंड गांव के डॉ. शिव प्रताप सिंह और उनके बड़े भाई विजय प्रताप सिंह ने श्राद्ध और तेरहवीं के मौके पर फिजूलखर्ची को ठुकराकर पर्यावरण और शिक्षा की राह अपनाई।

डॉ. शिव प्रताप, जो पीबीपीजी कॉलेज सिटी में हिंदी विभाग के अध्यक्ष हैं, ने अपने पिता देवमणि सिंह की याद में कुछ ऐसा किया जो दिल को छू जाए। 21 मार्च 2025 को 75 साल की उम्र में पिता का निधन हुआ। वह एक परिषदीय विद्यालय के शिक्षक थे और जीवन भर शिक्षा के प्रति समर्पित रहे। उनकी तेरहवीं के दिन, 3 अप्रैल को, परिवार ने दिखावे को दरकिनार कर एक नई परंपरा शुरू की। घर के पास तालाब के किनारे आम के पौधे लगाए गए। इन पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी परिवार ने अपने कंधों पर ली।

लेकिन यह पहल यहीं नहीं रुकी। पिता की शिक्षा के प्रति लगन को सम्मान देते हुए, डॉ. शिव प्रताप ने 13 जरूरतमंद बेटियों को चुना। इन बेटियों को चेक, शिक्षण सामग्री और फल देकर उनके सपनों को पंख दिए गए। डॉ. शिव प्रताप ने भावुक स्वर में कहा, पिताजी हमेशा बेटियों की शिक्षा के लिए चिंतित रहते थे। आज उनकी याद में यह कदम उठाकर मैं उनकी आत्मा को शांति और बेटियों को बेहतर भविष्य देने का संकल्प ले रहा हूं।

उन्होंने आगे कहा, ये पौधे जैसे-जैसे बढ़ेंगे, पर्यावरण को लाभ होगा और पिताजी का आशीर्वाद छांव बनकर हम पर बरसेगा। मैं हर साल उनकी याद में एक पौधा लगाऊंगा। उनका मानना है कि श्राद्ध और तेरहवीं जैसे संस्कार जरूरी हैं, लेकिन इनके नाम पर होने वाली फिजूलखर्ची और आडंबर को खत्म करना चाहिए। खासकर संपन्न लोगों को दिखावे से बचना चाहिए।

इस पहल की चारों ओर तारीफ हो रही है। प्राचार्य प्रो. अमित कुमार श्रीवास्तव ने इसे समाज के लिए एक संदेश बताया। उन्होंने कहा, यह कदम अपनों की यादों को सहेजने और पर्यावरण को बचाने का अनुपम उदाहरण है। वहीं, राज्य विश्वविद्यालय सम्बद्ध महाविद्यालय शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. पवन कुमार पचौरी ने कहा, आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को इस तरह की पहल के लिए आगे आना चाहिए। यह समाज को नई दिशा दे सकता है।

इस मौके पर प्रो. उपेंद्र कुमार सिंह, चंद्रसेन सिंह, शीतला प्रसाद तिवारी, जय प्रकाश उपाध्याय, डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. प्रणव ओझा, डॉ. केके सिंह, डॉ. सीपी पांडेय, डॉ. देवेश कुमार सिंह, डॉ. राकेश सिंह, अशोक मिश्र, शिव बहादुर सिंह, अजय कुमार सिंह, सर्वेश सिंह, प्रशांत शुक्ल, शैलेश सिंह, शेर बहादुर सिंह, अशोक सिंह, राम बहादुर सिंह, विजय प्रकाश मिश्र, हरिनारायण मिश्र, विनय राय, नितिन तिवारी, गौरव तिवारी, नीरज तिवारी, राजकुमार सरोज, छोटेलाल वर्मा समेत कई लोग मौजूद रहे।

Ramesh Pandey

मेरा नाम रमेश पाण्डेय है। पत्रकारिता मेरा मिशन भी है और प्रोफेशन भी। सत्य और तथ्य पर आधारित सही खबरें आप तक पहुंचाना मेरा कर्तव्य है। आप हमारी खबरों को पढ़ें और सुझाव भी दें।

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