अमलीपदर (गरियाबंद), 2 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की अमलीपदर तहसील क्षेत्र में इस साल मक्का की फसल तो भरपूर हुई, लेकिन किसानों के चेहरे पर मुस्कान नहीं आ सकी। अक्टूबर-नवंबर में हुई बेमौसम बारिश ने कटाई के समय खेतों में खड़ी और कटी हुई मक्का को भिगो दिया। नमी बढ़ने से दाने की चमक फीकी पड़ गई और व्यापारियों ने भाव एक झटके में 550-600 रुपये प्रति क्विंटल तक गिरा दिए।
क्षेत्र के मंडियों और गांवों में पीली मक्का इस समय 1400 से 1550 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है, जबकि पिछले साल यही मक्का 2000 से 2200 रुपये तक बिकी थी। मुड़गेलमाल, अमलीपदर, देवभोग सहित दर्जनों गांवों में किसान अपने घर-आंगन, ब्यारा और सड़क किनारे मक्का फैलाकर सुखाने को मजबूर हैं। तेज धूप में पीली मक्का सोने की तरह चमक तो रही है, पर जेब खाली देख किसान मायूस हैं।
किसान रामसिंह साहू ने बताया, इस बार फसल अच्छी थी, पर बारिश ने सब चौपट कर दिया। नमी 18-20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। रबी फसल के लिए खाद-बीज चाहिए, इसलिए मजबूरी में बेचना पड़ रहा है। एक अन्य किसान सुनीता बाई कहती हैं, सफेद मक्का की तो आवक ही बहुत कम है। जो पीली है, उसका भी सही दाम नहीं मिल रहा। क्षेत्रीय व्यापारी मानते हैं कि नमी अधिक होने से मक्का जल्दी खराब हो सकती है, इसलिए कम भाव दे रहे हैं।
किसानों का कहना है कि अगर सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू करे या सुखाने की कोई व्यवस्था करे तो नुकसान से बचा जा सकता है। फिलहाल रबी फसल की तैयारी के लिए किसान मजबूरी में कम दाम पर मक्का बेचकर आगे बढ़ने को विवश हैं।













