प्रतापगढ़ के शिक्षाविद डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव थाईलैंड में डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित

एक शिक्षक, कवि, साहित्यकार और समाजसेवी के रूप में वैश्विक पहचान को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान

प्रतापगढ़, 30 मई 2025। भारतीय हिंदी साहित्य, समाज सेवा और सांस्कृतिक चेतना के क्षेत्र में अपने अमूल्य योगदान के लिए प्रतापगढ़ के गौरव, पीबी इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता, कवि, साहित्यकार, समीक्षक और विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सेवा संगठनों के उच्च पदाधिकारी डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित बुद्धा इंटरनेशनल आनर सेरेमनी 2025 में डॉक्टरेट इन ह्यूमैनिटी की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें नैतिक लेखन, सामाजिक संवाद और मानवीय मूल्यों की स्थापना में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। यह उपलब्धि न केवल डॉ. श्रीवास्तव के लिए, बल्कि संपूर्ण प्रतापगढ़ और भारतीय साहित्यिक-सांस्कृतिक समुदाय के लिए गर्व का विषय है।

डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव एक संवेदनशील कवि, गहन चिंतक और समाज को दिशा देने वाले साहित्यकार हैं। उनकी लेखनी में राष्ट्रीय चेतना, धार्मिक सौहार्द, सांस्कृतिक समरसता, राष्ट्रप्रेम, श्रृंगार रस, वीर रस, सौंदर्य प्रेम, प्रकृति प्रेम, शिक्षा, संस्कार, सेवा भाव, अनुशासन और चरित्र निर्माण की भावना का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

उनकी रचनाएं समाज को जोड़ने और सामाजिक जागरूकता फैलाने का कार्य करती हैं। उनके साहित्यिक कार्यों में गहरी संवेदनशीलता और वैचारिक गहराई झलकती है, जो पाठकों को न केवल प्रेरित करती है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रोत्साहित भी करती है। उनकी कविताएं और लेख सामाजिक एकता, नैतिकता और मानवता के प्रति उनके गहरे समर्पण को दर्शाते हैं।

यह मानद उपाधि डॉ. श्रीवास्तव को एक भव्य समारोह में प्रदान की गई, जिसमें थाईलैंड, मलेशिया और भारत सहित विभिन्न देशों के गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। इस समारोह में हिज हाइनेस राजा जनरल ग्रैंड मास्टर प्रो. दातो सेरी डॉ. सुमपंद रथफट्टाया डीएससी (थाईलैंड), एचआईआरएच एचई महाराजा पंगेरन ड्यूक प्रिंस राडेन मास नगाबी (मलेशिया), थाईलैंड सरकार के पुलिस सलाहकार पोल. लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. मोनरुडी सोमार्ट, बौद्ध धमर्गुरु फ्रा अचन विचैन और भारत से धराधाम इंटरनेशनल के मानद कुलपति प्रो. डॉ. सौरभ पाण्डेय जी महाराज उपस्थित थे। इन विशिष्ट व्यक्तियों की उपस्थिति ने इस समारोह को और भी गरिमामय बना दिया।

समारोह में भारत सहित कई देशों के धार्मिक गुरु, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल थे। सभी ने डॉ. श्रीवास्तव की इस उपलब्धि को भारतीय सांस्कृतिक विचारधारा की वैश्विक स्वीकृति के रूप में सराहा। इस अवसर पर उनके साहित्यिक और सामाजिक योगदान की चर्चा हुई, और उनकी रचनाओं को मानवता के उत्थान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया। समारोह में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने उनके कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि डॉ. श्रीवास्तव की लेखनी और सामाजिक कार्य न केवल भारत, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

डॉ. श्रीवास्तव का जीवन और कार्य नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। एक शिक्षक के रूप में, उन्होंने पीबी इंटर कॉलेज, प्रतापगढ़ में अपनी सेवाएँ दीं और सैकड़ों छात्रों को शिक्षा, संस्कार और नैतिकता का पाठ पढ़ाया। उनके साहित्यिक कार्यों में उनकी गहरी अंतर्दृष्टि और सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता स्पष्ट रूप से झलकती है। उनकी कविताएँ और लेख न केवल साहित्यिक दृष्टिकोण से समृद्ध हैं, बल्कि सामाजिक सुधार और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके कार्यों में धार्मिक सौहार्द और सांस्कृतिक समरसता का संदेश विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो आज के समय में और भी प्रासंगिक है।

इस सम्मान की खबर जैसे ही प्रतापगढ़ और आसपास के इलाकों में फैली, स्वजनों, परिजनों, रिश्तेदारों, मित्रों, विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों और सैकड़ों शिक्षकों ने अपनी खुशी व्यक्त की। फोन और व्हाट्सएप के माध्यम से बधाई संदेशों की बाढ़ आ गई। स्थानीय समुदाय ने इसे न केवल डॉ. श्रीवास्तव की व्यक्तिगत उपलब्धि, बल्कि प्रतापगढ़ के लिए गर्व का क्षण बताया। कई सामाजिक संगठनों ने उनके इस सम्मान को भारतीय साहित्य और संस्कृति के वैश्विक मंच पर मान्यता के रूप में देखा।

डॉ. श्रीवास्तव ने इस सम्मान को स्वीकार करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए केवल एक उपाधि नहीं, बल्कि समाज सेवा और साहित्य के प्रति उनकी जिम्मेदारी को और बढ़ाने वाला है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, मेरी लेखनी और कार्य हमेशा समाज को जोड़ने और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित रहे हैं। यह सम्मान मेरे लिए एक प्रेरणा है कि मैं और अधिक उत्साह के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करूं । उन्होंने थाईलैंड की बुद्धा इंटरनेशनल आॅनर सेरेमनी के आयोजकों और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया।

यह सम्मान भारतीय साहित्य और सांस्कृतिक चेतना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। डॉ. श्रीवास्तव जैसे व्यक्तियों के कार्य नई पीढ़ी को यह सिखाते हैं कि साहित्य और समाज सेवा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि न केवल प्रतापगढ़, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है। यह सम्मान भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक है, जो यह दर्शाता है कि साहित्य और समाज सेवा की शक्ति सीमाओं को पार कर सकती है।

इस समारोह ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि भारत की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत विश्व मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव का यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का सम्मान है, बल्कि यह उन सभी के लिए प्रेरणा है जो समाज और साहित्य के क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं।