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फ़ातिमा बॉश, मॉडलिंग जगत की जानी-मानी हस्ती

फ़ातिमा बॉश, मॉडलिंग जगत की जानी-मानी हस्ती

बैंकाक, 12 नवंबर 2025। मिस यूनिवर्स 2025 प्रतियोगिता में इस साल न केवल सुंदरता बल्कि आत्मसम्मान की भी चर्चा हो रही है, जिसकी वजह बनीं मिस मेक्सिको फ़ातिमा बॉश। 26 वर्षीय बॉश तब सुर्खियों में आईं जब थाईलैंड के प्रतियोगिता निदेशक नवात इत्साराग्रिसिल ने एक लाइव कार्यक्रम के दौरान उन्हें सार्वजनिक रूप से ‘बेवकूफ़’ कह दिया। इस घटना के बाद वे कुछ समय के लिए प्रतियोगिता से बाहर चली गईं, लेकिन अब उनकी वापसी गरिमा और साहस की प्रतीक बन चुकी है।

मेक्सिको में जन्मी और पली-बढ़ी फ़ातिमा बॉश न केवल मॉडलिंग जगत की जानी-मानी हस्ती हैं, बल्कि सामाजिक वकालत में भी सक्रिय हैं। वह नई पीढ़ी की उन प्रतियोगियों में शामिल हैं जो मिस यूनिवर्स को सिर्फ ग्लैमर का नहीं, बल्कि सशक्तिकरण का मंच मानती हैं। बॉश महिलाओं के अधिकार, आत्मसम्मान और समान अवसरों के लिए मुखर रही हैं, और 4 नवंबर की घटना के बाद उनका यह संदेश और भी अधिक प्रभावशाली हो गया है।

दरअसल, एक लाइव सैशिंग समारोह के दौरान, जब बॉश प्रायोजक शूट में शामिल नहीं हो पाईं, तो नवात इत्साराग्रिसिल ने उन्हें सभी के सामने फटकार लगाई। अपनी बात रखने की कोशिश कर रही फ़ातिमा को बीच में रोकते हुए उन्होंने उन्हें “बेवकूफ़” कहा। यह दृश्य कैमरे में कैद हुआ और कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

घटना के बाद इत्साराग्रिसिल ने लाइवस्ट्रीम में सार्वजनिक माफी मांगी और स्वीकार किया कि उन्होंने भावनाओं में आकर गलती की, लेकिन तब तक विवाद गहराता जा चुका था। बॉश ने अपमानजनक व्यवहार का विरोध करते हुए मंच छोड़ दिया, और उनके समर्थन में कई अन्य प्रतियोगी, जिनमें मिस यूनिवर्स 2024 विक्टोरिया केजर थेलविग भी शामिल थीं, बाहर चली गईं।

सोशल मीडिया पर फ़ातिमा बॉश के साहस की सराहना होने लगी। समर्थकों ने कहा कि उन्होंने शालीनता के साथ यह दिखाया कि सच्ची ताकत चुप्पी में भी झलकती है। एक यूज़र ने लिखा, उसने मंच नहीं छोड़ा, उसने सम्मान चुना।

थाईलैंड में रह रही बॉश ने बाद में पुष्टि की कि वह आगामी 21 नवंबर को होने वाली मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने दृढ़ता से कहा, कोई भी मुझे कभी छोटा महसूस नहीं कराएगा। यह वाक्य अब उनके साहस और आत्मगौरव का प्रतीक बन चुका है।

फ़ातिमा बॉश के लिए यह प्रतियोगिता अब केवल ताज जीतने की नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की विजय की कहानी बन गई है।