गौरा (प्रतापगढ़), 8 नवंबर 2025। सुल्तानपुर समिति पर उच्चाधिकारियों ने 400 बोरी एनपीके उपलब्ध कराई है जबकि यहां सदस्यों की संख्या 1250 है। सदस्यों की संख्या की तुलना में उपलब्ध एनपीके आवश्यकता की एक तिहाई के करीब है।
वर्तमान में रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं, आलू, मटर और चना की बुआई का समय जारी है। इस दौरान किसानों को डीएपी उर्वरक की भारी आवश्यकता होती है, लेकिन कई जगहों पर इसकी कमी देखने को मिल रही है। ऐसे में किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इसके विकल्प के रूप में एनपीके खाद उपलब्ध कराई है, जिससे रबी फसलों की बुआई पर असर न पड़े।
प्रतापगढ़ जिले के विकासखंड गौरा के अंतर्गत आने वाली सहकारी समिति सुल्तानपुर पर विभाग ने 400 बोरी एनपीके खाद भेजी है। समिति के सचिव संतोष तिवारी ने बताया कि यह खाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर किसानों के लिए उपलब्ध कराई गई है। समिति से जुड़े लगभग 1250 सदस्य किसान हैं, जिन्हें जरूरत के अनुसार एनपीके खाद वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
संतोष तिवारी ने बताया कि एनपीके में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश तीनों तत्व संतुलित मात्रा में होते हैं, जो फसलों की शुरुआती वृद्धि और उत्पादन में सहायक होते हैं। इस उर्वरक के उपयोग से किसानों को डीएपी की कमी का असर नहीं झेलना पड़ेगा।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले के अन्य विकासखंडों में भी एनपीके खाद भेजी जा रही है, ताकि किसानों को समय पर उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। सरकार का लक्ष्य है कि रबी सीजन के दौरान किसी भी किसान को खाद की कमी का सामना न करना पड़े।














