नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2026। दिल्ली विश्वविद्यालय समुद्री शिक्षा, शोध और कौशल विकास को बढ़ावा देगा। इसके लिए दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में दो महत्वपूर्ण एमओयू किया गया। इस मौके पर केन्द्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल मौजूद रहे।
पहला एमओयू दिल्ली विश्वविद्यालय और विकासशील देशों की अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (आरआईएस) स्थित सेंटर फॉर मैरीटाइम इकोनॉमी एंड कनेक्टिविटी (सीएमईसी) के बीच हुआ। इस एमओयू का उद्देश्य भारत के दीर्घकालिक समुद्री विजन के अनुरूप समुद्री शिक्षा, अनुसंधान और क्षमता निर्माण को मजबूत करना है।
केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा, जैसे-जैसे हम विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं, समुद्री क्षेत्र भारत के आर्थिक विकास, व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता और सतत विकास को गति देने में और भी अधिक परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगा। समुद्री प्रतिभा पाइपलाइन को मजबूत करके जो इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य है हम गुणवत्ता और पैमाने दोनों में विश्व स्तरीय समुद्री पेशेवरों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बना रहे हैं, जो भारत को इस क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करेगा।
भारत के रणनीतिक समुद्री लाभों पर प्रकाश डालते हुए, मंत्री ने उल्लेख किया कि 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और 111 राष्ट्रीय जलमार्गों (एनडब्लू) के साथ, समुद्री इकोसिस्टम को मजबूत करना एक राष्ट्रीय अनिवार्यता है। सोनोवाल ने इस बात पर जोर दिया कि सागर और महासागर सिद्धांतों द्वारा निर्देशित सरकार का समुद्री विजन, क्षेत्रीय सहयोग, समुद्री सुरक्षा और साझा समृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह एमओयू शैक्षणिक जगत और नीतिगत संस्थानों के बीच अंतःविषय सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास करता है, जिसका मुख्य ध्यान उभरते हुए समुद्री क्षेत्रों में कौशल विकास, क्षमता निर्माण और अनुसंधान पर है। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में समुद्री पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षणिक ढांचे का विकास, संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, ज्ञान का प्रसार और छात्रों के लिए पेशेवर परामर्श शामिल हैं।
सोनोवाल ने इस सहयोग को एक भविष्योन्मुखी कदम बताया जो शिक्षा और उद्योग के बीच की खाई को पाटता है, जिससे युवाओं के लिए भारत के विस्तार करते समुद्री क्षेत्र से जुड़ने के अवसर पैदा होंगे। नौवहन मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की समुद्री आकांक्षाओं के केंद्र में मानव पूंजी होगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पिछले 12 वर्षों में देश के नाविक कार्यबल में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है और अब यह वैश्विक समुद्री कार्यबल में लगभग 12% का योगदान देता है, जिसे 2030 तक 20% तक पहुँचाने का लक्ष्य है। सोनोवाल ने कहा, “दिल्ली विश्वविद्यालय और सीएमईसी के बीच यह समझौता समुद्री शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास को बढ़ावा देगा।”
केन्द्रीय मंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत का समुद्री कायाकल्प एक एकीकृत दृष्टिकोण द्वारा संचालित हो रहा है, जिसमें बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी, सस्टेनेबिलिटी की पहल और डिजिटलीकरण शामिल हैं। उन्होंने सागरमाला और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 जैसे प्रमुख कार्यक्रमों को इस विकास पथ के मुख्य आधार के रूप में रेखांकित किया।
इस सहयोग से समुद्री लॉजिस्टिक्स, ग्रीन शिपिंग, सप्लाई चेन मैनेजमेंट और समुद्री नीति जैसे क्षेत्रों में छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नए रास्ते खुलने की उम्मीद है, जो एक टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ब्लू इकोनॉमी के व्यापक विजन में योगदान देंगे।
दूसरा एमओयू आरआईएस और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (डीएसई) के बीच हुआ। यह सार्वजनिक नीति अनुसंधान और प्रशिक्षण में संयुक्त कार्यक्रमों को बढ़ावा देगा।
इस समारोह में वरिष्ठ अधिकारी, शैक्षणिक नेतृत्व, संकाय सदस्य और छात्र उपस्थित रहे, जो भारत के समुद्री क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान और नीति को एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।