रायपुर, 21 मई 2026। छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर में स्वास्थ्य सेवाओं की अलख जगाने वाले और हजारों आदिवासियों के लिए मसीहा बने डॉ. रामचंद्र गोडबोले को ‘पद्मश्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। 25 मई 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित गरिमामयी समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से नवाजेंगी।
मूल रूप से महाराष्ट्र के सतारा के रहने वाले आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. रामचंद्र गोडबोले वर्ष 1990 में अपनी पत्नी सुनीता गोडबोले के साथ बस्तर के बारसूर आए थे। डॉ. अल्बर्ट स्वाइटजर के जीवन और उनकी सेवा भावना से प्रेरित होकर उन्होंने अपना जीवन वनांचल के लोगों को समर्पित करने का निर्णय लिया। बारसूर के वनवासी कल्याण आश्रम में बंद पड़े क्लीनिक को पुनर्जीवित कर उन्होंने चिकित्सा सेवा की जो नींव रखी, वह आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुकी है।
भाषा से लेकर इलाज तक का सफर
गोडबोले दंपत्ति ने न केवल आदिवासियों का मुफ्त इलाज किया, बल्कि उनके साथ बेहतर संवाद स्थापित करने के लिए स्थानीय बोलियां भी सीखीं। उन्होंने उन दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाईं, जहां तक आज भी सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचना एक चुनौती है। अब तक वे एक लाख से अधिक आदिवासियों का सफल उपचार कर चुके हैं। इस सेवा कार्य में उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले का योगदान सराहनीय रहा है, जिन्होंने आदिवासियों के स्वास्थ्य के साथ ही बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए अभिभावकों को निरंतर प्रेरित किया।
पीपुल्स पद्म का सच्चा उदाहरण
केंद्र सरकार की ‘पीपुल्स पद्म’ पहल के तहत इस वर्ष उन गुमनाम नायकों को सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने लाइमलाइट से दूर रहकर समाज के लिए असाधारण कार्य किए हैं। इस वर्ष 131 पद्म पुरस्कारों की सूची में गोडबोले जैसे निस्वार्थ सेवाभावी का नाम शामिल होना, उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा है जो समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की सेवा में समर्पित हैं।
