रायपुर, 24 अगस्त 2026। संत युधिष्ठिरलाल का नाम इन दिनों 150 पाकिस्तानी दुल्हनों के परिवार में सुर्खियों में है। संत युधिष्ठिरलाल की नेक पहल से 150 पाकिस्तानी दुल्हनों के लिए भारत का रास्ता खुला और अब वे अपने जीवन साथी के साथ सात फेरे ले सकेंगी।
बता दें आॅपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव का असर उन परिवारों पर भी पड़ा, जिनके रिश्ते दशकों से सरहद के आर-पार जुड़े हुए हैं। वीजा पाबंदियों के कारण पाकिस्तान के सिंध प्रांत की करीब 150 महिलाओं की भारतीय युवकों से प्रस्तावित शादियां अटक गई थीं। अब इन दुल्हनों के लिए भारत आने का रास्ता खुल गया है।
केंद्र सरकार ने विशेष पहल करते हुए उन्हें और उनके परिजनों को वीजा जारी किया, जिसके बाद वे दूसरे देशों के ट्रांजिट रूट से हवाई मार्ग के जरिए भारत पहुंच सकीं। इस पूरे मामले में रायपुर के संत युधिष्ठिरलाल शदानी की पहल अहम रही।
पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी स्थित प्रसिद्ध हिंदू धार्मिक स्थल शदानी दरबार के आध्यात्मिक प्रमुख संत शदानी के पास जब प्रभावित परिवारों ने अपनी समस्या पहुंचाई तो उन्होंने भारत में पहले से सगाई कर चुकी पाकिस्तानी महिलाओं की सूची तैयार करवाई। इसके बाद शदानी दरबार की ओर से यह सूची केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई और दुल्हनों तथा उनके परिवारों के लिए भारत आने की अनुमति देने का आग्रह किया गया।
लंबे इंतजार के बाद मिली राहत
सिंधी समुदाय के नेता राजेश झांबिया के मुताबिक, वीजा सेवाएं बंद होने के बाद बड़ी संख्या में परिवार अपनी बेटियों की शादी को लेकर परेशान थे। वर्षों से सिंधी परिवार वाघा-अटारी सीमा के जरिए भारत आते-जाते रहे हैं और भारत में रिश्तेदारी होने के कारण शादी-ब्याह के कार्यक्रमों में भी आसानी से शामिल होते रहे हैं। लेकिन सीमा तनाव के बाद लगी पाबंदियों ने इस परंपरा को लगभग रोक दिया था।
झांबिया ने कहा कि अब लंबे इंतजार के बाद इन परिवारों को राहत मिली है। केंद्र सरकार ने दुल्हनों और उनके रिश्तेदारों को वीजा जारी किया, हालांकि भारत आने के लिए उन्हें हवाई मार्ग का इस्तेमाल करने की शर्त रखी गई। इसके बाद प्रभावित महिलाएं और उनके परिजन दूसरे देशों के ट्रांजिट रूट से भारत पहुंचे।
सरहद से बड़ी रिश्तों की डोर
सिंधी समुदाय के लिए यह सिर्फ वीजा मिलने का मामला नहीं, बल्कि दशकों पुराने पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों के फिर से जुड़ने का अवसर है। भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और यात्रा प्रतिबंधों के कारण जिन परिवारों की खुशियां थम गई थीं, उनके लिए अब शादी की तैयारियां दोबारा शुरू होने की उम्मीद जगी है। समुदाय के लोगों का कहना है कि संत युधिष्ठिरलाल शदानी की पहल और केंद्र सरकार के सहयोग से करीब 150 दुल्हनों के लिए भारत आने का रास्ता साफ हुआ है।
