रायपुर, 12 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में बहुत सारे ऐसे संस्थान चिन्हित हुए हैं जो अपने यहां के कर्मचारियों के पीएफ अकाउंट में अंशदान नहीं जमा कर रहे हैं। ऐसे संस्थानों पर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर ने सख्ती करना शुरू कर दिया है। ईपीएफओ ने छत्तीसगढ़ के चूककर्ता संस्थानों के विरुद्ध वसूली और प्रवर्तन कार्रवाई तेज कर दी है। वर्ष 2026 की शुरुआत में चूककर्ता संस्थानों पर कुल 24.74 करोड़ रुपये की बकाया राशि दर्ज की गई थी, जिसमें से अगस्त 2026 तक 4.23 करोड़ रुपये की सफल वसूली की जा चुकी है। शेष राशि की वसूली के लिए सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के प्रावधानों के तहत विधिक एवं वसूली कार्रवाई की जा रही है।
अंशदान में विलंब करने वाले तथा प्रदेश के बड़े चूककर्ता संस्थानों के विरुद्ध जांच और कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त जयवदन इंगले के नेतृत्व में प्रवर्तन अधिकारियों की विशेष टीमें गठित की गई हैं। इन टीमों के माध्यम से बकाया अंशदान की पहचान, वसूली और अनुपालन सुनिश्चित करने की कार्रवाई की जा रही है।
इसी बीच, नियोक्ताओं को पुराने विवादों और दंडात्मक मुकदमों से राहत देने तथा लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के प्रावधानों के तहत ‘विश्वास-2026’ योजना लागू की है। इसे 29 जून 2026 को अधिसूचना संख्या जी.एस.आर. 525(ई) के माध्यम से अधिसूचित किया गया है। योजना अधिसूचना की तिथि से छह माह तक प्रभावी रहेगी।
‘विश्वास-2026’ का उद्देश्य क्षतिपूर्ति एवं हर्जाने से संबंधित पुराने विवादों का शीघ्र निपटारा, लंबित मुकदमेबाजी में कमी, नियोक्ताओं को अनुपालन नियमित करने का अवसर तथा कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा हितों की रक्षा करना है। योजना के माध्यम से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और प्रतिष्ठानों के बीच विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
योजना के तहत विभिन्न श्रेणियों के पात्र मामलों को शामिल किया गया है। इनमें सक्षम न्यायिक मंचों, जैसे केंद्रीय सरकारी औद्योगिक न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित क्षतिपूर्ति अथवा हर्जाने से संबंधित मामले शामिल हैं। ऐसे मामले भी पात्र हो सकते हैं जिनमें अंतिम आदेश पारित हो चुका है, लेकिन राशि पूरी या आंशिक रूप से बकाया है। इनमें वसूली प्रमाण-पत्र वाले मामले भी शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, जिन मामलों में कार्यवाही शुरू होकर नोटिस जारी हो चुका है, लेकिन अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ है, तथा ऐसे मामले जिनमें चूक की पहचान हो चुकी है लेकिन अभी नोटिस जारी नहीं किया गया है, वे भी योजना के दायरे में आ सकते हैं।
‘विश्वास-2026’ की प्रमुख विशेषता यह है कि पात्र प्रतिष्ठानों को निर्धारित परिस्थितियों में सामान्य दरों की तुलना में कम दर पर क्षतिपूर्ति एवं हर्जाने से संबंधित मामलों के निपटारे का अवसर दिया गया है। उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार चूक की अवधि और मामले की प्रकृति के आधार पर क्षतिपूर्ति की दर 0.25 प्रतिशत से 1 प्रतिशत प्रति माह तक हो सकती है। इससे लंबे समय से लंबित विवादों के त्वरित समाधान में नियोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
ईपीएफओ ने स्थापित किया विश्वास प्रकोष्ठ
योजना के तहत निपटारे के लिए पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध प्रक्रिया अपनाई गई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के क्षेत्रीय कार्यालय में ‘विश्वास प्रकोष्ठ’ स्थापित किया गया है, जहां प्रतिष्ठानों को योजना, आवेदन प्रक्रिया और मामलों के निस्तारण से संबंधित आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। क्षेत्रीय कार्यालय ने सभी चूककर्ता संस्थानों से अपील की है कि वे वैधानिक ब्याज के साथ देय राशि का भुगतान कर ऑनलाइन माध्यम से ‘विश्वास-2026’ का लाभ उठाएं और संभावित दंडात्मक कार्रवाई तथा कुर्की की कार्रवाई से बचें।
कर्मचारी नामांकन अभियान भी शुरू
इसके साथ ही भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा कर्मचारी नामांकन अभियान-2026 भी शुरू किया गया है। यह अभियान 1 जुलाई 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इसके तहत 1 अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2026 के बीच कर्मचारी भविष्य निधि योजना से छूटे पात्र कर्मचारियों के स्वैच्छिक नामांकन का अवसर दिया गया है। यदि नियोक्ता द्वारा पूर्व में कर्मचारी का अंशदान नहीं काटा गया था, तो कर्मचारी का अंशदान माफ किया जा सकता है। ऐसे मामलों में नियोक्ता को अपना अंशदान, ब्याज और प्रशासनिक शुल्क जमा करना होगा, जबकि हर्जाना अधिकतम 100 रुपये तक सीमित रहेगा।
छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के लिए भी 29 जून 2026 की अधिसूचना संख्या जी.एस.आर. 525(ई) के माध्यम से ‘कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026’ अधिसूचित की गई है। इसके भाग-सी में ‘एम्नेस्टी-2026’ नामक एकमुश्त राहत योजना का प्रावधान किया गया है, जो अधिसूचना की तिथि से छह माह तक लागू रहेगी। इसके तहत ऐसे प्रोविडेंट फंड ट्रस्टों को अपने पूर्ववर्ती कार्यकाल के कार्योत्तर नियमितीकरण का अवसर मिलेगा, जो आयकर अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त थे, लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि संबंधी कानून के तहत औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं थे। पात्र संस्थानों को देय राशि, हर्जाने और ब्याज संबंधी कार्रवाई में राहत के साथ न्यूनतम कर्मचारी संख्या तथा कोष संबंधी निर्धारित शर्तों में भी छूट का प्रावधान किया गया है।
